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भारत-नेपाल सीमा पर बढ़ी हलचल, नो-मैन्स लैंड के पास बन रहा वॉच टावर; चीन की गतिविधियों से सुरक्षा एजेंसियां सतर्क

पटना: भारत-नेपाल की खुली और संवेदनशील सीमा पर नेपाल में चल रही निर्माण गतिविधियों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। सीमा के पास नेपाल की ओर कई स्थानों पर बुनियादी ढांचे से जुड़े काम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इनमें नो-मैन्स लैंड के करीब वॉच टावर का निर्माण भी शामिल है। इस गतिविधि को भारत-नेपाल सीमा की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल की तरफ भारत-नेपाल सीमा के नजदीक कई निर्माण परियोजनाएं चल रही हैं। इनमें कुछ परियोजनाओं में चीन की निर्माण एजेंसियों की भूमिका भी बताई गई है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नो-मैन्स लैंड के करीब एक वॉच टावर का निर्माण किया जा रहा है। हालांकि, इन निर्माण गतिविधियों के वास्तविक उद्देश्य और सुरक्षा पर उनके संभावित प्रभाव को लेकर संबंधित एजेंसियां निगरानी कर रही हैं।

सीमा पर पहले से बढ़ी है गतिविधि

भारत और नेपाल के बीच करीब 1,750 किलोमीटर लंबी खुली सीमा है। दोनों देशों के नागरिकों के बीच लंबे समय से सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध रहे हैं। खुली सीमा के कारण दोनों तरफ लोगों की आवाजाही भी होती है। ऐसे में सीमा क्षेत्र में किसी भी बड़े निर्माण या रणनीतिक गतिविधि को सुरक्षा के नजरिए से महत्वपूर्ण माना जाता है।

रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम चंपारण से लगी भारत-नेपाल सीमा के आसपास पिछले कुछ समय में नेपाल की ओर सड़क, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे के निर्माण की गतिविधियां दिखाई दी हैं। वाल्मीकिनगर से करीब 30 किलोमीटर दूर नेपाल की ओर चार लेन सड़क का निर्माण भी चीन की मदद से पूरा किए जाने का उल्लेख किया गया है।

चीन की भूमिका पर भी नजर

रिपोर्ट में नेपाल में चीन की निर्माण एजेंसियों से जुड़ी कुछ परियोजनाओं का जिक्र किया गया है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-नेपाल सीमा जैसे संवेदनशील इलाके में किसी भी विदेशी एजेंसी की निर्माण गतिविधियों पर नजर रखना जरूरी है।

हालांकि, केवल किसी निर्माण परियोजना में विदेशी कंपनी या एजेंसी की मौजूदगी को सुरक्षा खतरे का प्रमाण नहीं माना जा सकता। इसके बावजूद सीमा की संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां ऐसी गतिविधियों की जानकारी जुटाती रहती हैं।

कई स्थानों पर बुनियादी ढांचे का निर्माण

रिपोर्ट में नेपाल की तरफ सीमा के आसपास सड़क, पुल और अन्य निर्माण कार्यों का भी उल्लेख है। इनमें वाल्मीकि आश्रम क्षेत्र तक पहुंच से जुड़े पुल और सड़क निर्माण जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। इन परियोजनाओं से स्थानीय लोगों और पर्यटकों की आवाजाही आसान हो सकती है, लेकिन रणनीतिक दृष्टि से इनके प्रभाव का आकलन भी जरूरी है।

सुरक्षा एजेंसियां सतर्क

भारत-नेपाल सीमा पर तैनात सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती खुली सीमा के कारण होने वाली आवाजाही पर नजर रखना है। सीमा क्षेत्र में पुलिस, एसएसबी और स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय के जरिए गतिविधियों पर निगरानी रखी जाती है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत और नेपाल के बीच पारंपरिक संबंधों को बनाए रखते हुए सीमा की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर दोनों देशों के बीच संवाद और समन्वय जरूरी है। नो-मैन्स लैंड के पास निर्माण गतिविधियों और वॉच टावर को लेकर आगे की स्थिति पर सुरक्षा एजेंसियों की नजर बनी हुई है।


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