पटना। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) में एक बार फिर अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी और पूर्व लोकसभा प्रत्याशी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर लंबी पोस्ट लिखकर पार्टी के भीतर सक्रिय एक गुट पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सीधे तौर पर संजय यादव, रमीज और सुनील सिंह का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि ये लोग पार्टी और संगठन को कमजोर कर रहे हैं। इतना ही नहीं, रोहिणी ने दो टूक शब्दों में चुनौती देते हुए कहा कि यदि पार्टी नेतृत्व में हिम्मत है तो सबसे पहले उन्हें पार्टी से बाहर निकालकर दिखाए।
रोहिणी आचार्य का यह बयान ऐसे समय आया है जब सारण जिले के राजद प्रवक्ता हरेलाल यादव को छह वर्षों के लिए पार्टी से निष्कासित किया गया है। रोहिणी ने इस कार्रवाई को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि अनुशासनहीनता का झूठा आरोप लगाकर एक ईमानदार और जमीनी कार्यकर्ता को निशाना बनाया गया है। उनके मुताबिक, पार्टी में सच्चाई बोलने वाले और संगठन के लिए मेहनत करने वाले लोगों को लगातार किनारे किया जा रहा है।
अपनी फेसबुक पोस्ट में रोहिणी ने आरोप लगाया कि सारण का जिला संगठन ऐसे लोगों के कब्जे में है जो पार्टी में रहते हुए भी विरोधियों के इशारों पर काम करते हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान भी कई नेताओं ने पार्टी के पक्ष में सक्रिय भूमिका नहीं निभाई, जबकि जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को ही साजिश के तहत निशाना बनाया जा रहा है।
रोहिणी ने स्पष्ट शब्दों में लिखा कि यदि संजय यादव और उनके करीबी नेताओं पर सवाल उठाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करनी है तो सबसे पहले उन पर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा, "मैं लालू जी की बेटी हूं, गलत के सामने कभी घुटने नहीं टेकूंगी। पार्टी को संजय यादव, रमीज और सुनील सिंह जैसे लोगों के चंगुल से मुक्त कराने के लिए आवाज उठाती रहूंगी।" उन्होंने यह भी कहा कि उनके समर्थक किसी निष्कासन की परवाह किए बिना उनके साथ मजबूती से खड़े रहेंगे।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सारण लोकसभा चुनाव में हार के बाद से रोहिणी आचार्य लगातार पार्टी संगठन और कुछ नेताओं की कार्यशैली पर सवाल उठा रही हैं। इस बार उन्होंने सीधे नाम लेकर हमला किया है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि राजद की अंदरूनी खींचतान अब सार्वजनिक मंच तक पहुंच चुकी है। आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व इस बयान पर क्या रुख अपनाता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं। यदि विवाद और बढ़ता है तो इसका असर संगठनात्मक एकता और आगामी चुनावी तैयारियों पर भी पड़ सकता है।
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