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पटना। बिहार में सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में दाखिले से जुड़ी आरक्षण व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि आरक्षित वर्ग का कोई अभ्यर्थी यदि अपनी योग्यता और अंकों के आधार पर मेरिट लिस्ट में अनारक्षित श्रेणी के कटऑफ से ऊपर आता है, तो उसे सामान्य यानी अनारक्षित सीट पर ही स्थान दिया जाएगा। ऐसे अभ्यर्थी को आरक्षित कोटे में समायोजित नहीं किया जाएगा।

यह निर्देश खास तौर पर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अत्यंत पिछड़ा वर्ग, पिछड़ा वर्ग और अन्य आरक्षित श्रेणियों से आने वाले मेधावी अभ्यर्थियों के हित से जुड़ा है। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से यह कदम चयन आयोगों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण नियमों के कथित गलत अनुपालन से जुड़ी शिकायतों के बाद उठाया गया है।

क्या है पूरा विवाद?

दरअसल, बिहार में सरकारी सेवाओं और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण से जुड़े प्रावधानों के तहत मेरिट में आने वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को अनारक्षित श्रेणी में शामिल किए जाने का प्रावधान है। इसका मतलब यह है कि यदि कोई आरक्षित वर्ग का अभ्यर्थी बिना आरक्षण का लाभ लिए सामान्य कटऑफ के आधार पर चयनित होने की स्थिति में है, तो उसकी सीट आरक्षित कोटे में नहीं गिनी जानी चाहिए।

विभाग के सामने ऐसी शिकायतें पहुंची थीं कि कुछ भर्ती आयोगों और संस्थानों की मेरिट लिस्ट में आरक्षित वर्ग के अधिक अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को भी आरक्षित कोटे में समायोजित किया जा रहा था। इससे आरक्षित वर्ग के उन अन्य अभ्यर्थियों के लिए उपलब्ध सीटों की संख्या प्रभावित हो रही थी, जो आरक्षित कोटे के तहत चयन की पात्रता रखते हैं।

सरकार के नए निर्देश के बाद मेरिट में ऊपर रहने वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को पहले अनारक्षित सीटों पर समायोजित किया जाएगा। इसके बाद आरक्षित श्रेणी की सीटों पर उस श्रेणी के अगले पात्र अभ्यर्थियों को अवसर मिलेगा।

आरक्षण का गणित

बिहार में आरक्षण व्यवस्था के तहत अनुसूचित जाति के लिए 16 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति के लिए 1 प्रतिशत, अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लिए 18 प्रतिशत, पिछड़ा वर्ग के लिए 12 प्रतिशत और पिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए 3 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान बताया गया है। इसके अलावा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण है, जबकि 40 प्रतिशत सीटें अनारक्षित श्रेणी के लिए रहती हैं।

सरकार का ताजा निर्देश मेरिट और आरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे आरक्षित वर्ग के उन अभ्यर्थियों को फायदा मिलने की उम्मीद है, जो अपनी योग्यता के आधार पर सामान्य मेरिट में जगह बनाते हैं।

आयोगों और संस्थानों को चेतावनी

सामान्य प्रशासन विभाग ने चयन आयोगों और संबंधित विभागों को नियमों का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। विभाग ने साफ किया है कि आरक्षण से जुड़े प्रावधानों का पालन करते समय किसी भी स्तर पर ऐसी व्यवस्था नहीं होनी चाहिए, जिससे मेरिट में बेहतर प्रदर्शन करने वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी को उसके वास्तविक अधिकार से वंचित होना पड़े।

अब भर्ती परीक्षाओं और शैक्षणिक संस्थानों की मेरिट लिस्ट तैयार करते समय इस व्यवस्था का पालन करना होगा। माना जा रहा है कि इससे आने वाली सरकारी भर्तियों में आरक्षित वर्ग के मेधावी अभ्यर्थियों के लिए सामान्य सीटों पर चयन का रास्ता और स्पष्ट होगा, जबकि आरक्षित सीटों का लाभ उसी श्रेणी के अन्य पात्र अभ्यर्थियों को मिल सकेगा।


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