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पटना, 17 जुलाई: बिहार में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अब इस वर्ष अक्टूबर-नवंबर में नहीं कराए जाएंगे। राज्य सरकार ने पंचायत चुनाव को लगभग एक वर्ष के लिए स्थगित कर दिया है। अब चुनाव जुलाई-अगस्त 2027 में कराए जाने की तैयारी है। सरकार का कहना है कि चुनाव से पहले पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों का नए सिरे से परिसीमन किया जाएगा। यह प्रक्रिया 2011 की जनगणना के आधार पर होगी।

जानकारी के अनुसार, अगस्त 2026 से परिसीमन का कार्य शुरू होगा और अप्रैल 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए राज्य निर्वाचन आयोग एक विशेष डेडिकेटेड आयोग का गठन करेगा, जो करीब दो से तीन महीने में अपनी रिपोर्ट देगा। रिपोर्ट के आधार पर पंचायत क्षेत्रों, वार्डों और प्रतिनिधित्व की नई सीमाएं तय की जाएंगी।

सरकार का मानना है कि 36 वर्षों से पंचायतों का परिसीमन नहीं हुआ है। 2011 की जनसंख्या के आधार पर नए परिसीमन से आबादी के अनुसार संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा। साथ ही पंचायतों में भौगोलिक और सामाजिक संतुलन भी बेहतर होगा।

चुनाव टलने के कारण वर्तमान पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल लगभग 9 से 10 महीने तक बढ़ सकता है। इससे पंचायत स्तर पर विकास कार्यों की निरंतरता बनी रहेगी और प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित नहीं होगी। हालांकि विपक्ष और कुछ सामाजिक संगठनों ने चुनाव टालने के फैसले पर सवाल भी उठाए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि परिसीमन एक तकनीकी और आवश्यक प्रक्रिया है, जिससे भविष्य में पंचायतों की संरचना अधिक संतुलित और प्रभावी बनेगी। हालांकि चुनाव में देरी से लोकतांत्रिक प्रक्रिया कुछ समय के लिए प्रभावित होगी, लेकिन सरकार का दावा है कि यह कदम पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

अब सभी की निगाहें परिसीमन प्रक्रिया और राज्य निर्वाचन आयोग की तैयारियों पर हैं। यदि तय समयसीमा के अनुसार कार्य पूरा होता है, तो बिहार में पंचायत चुनाव जुलाई-अगस्त 2027 में आयोजित किए जाएंगे।


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