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पटना/नई दिल्ली: राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने नीट यूजी 2026 का परिणाम घोषित कर दिया है। इस वर्ष परीक्षा में शामिल हुए लाखों छात्रों में से 11.21 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने सफलता हासिल की। कुल सफलता दर लगभग 58 प्रतिशत रही। मेडिकल, डेंटल और आयुष पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित इस परीक्षा में पंजाब और हरियाणा के दो छात्रों ने संयुक्त रूप से पहला स्थान प्राप्त किया। दोनों ने 720 में से 715 अंक हासिल कर ऑल इंडिया टॉप रैंक साझा की।

बिहार के लिए इस वर्ष का परिणाम भी गौरवपूर्ण रहा। राज्य के आयुष भल्लोटिया ने ऑल इंडिया रैंक-4 हासिल कर देशभर में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। इसके अलावा बिहार के रियां रंजन छठे, दानापुर के रविकांत दिवाकर 55वें और आदित्य कुमार 73वें स्थान पर रहे। इससे एक बार फिर साबित हुआ कि बिहार के छात्र राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।

एनटीए के अनुसार इस वर्ष 20 लाख से अधिक उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए थे। इनमें से लगभग 11.21 लाख छात्र सफल घोषित किए गए। सामान्य वर्ग के करीब 2.91 लाख, ओबीसी के 5.12 लाख, एससी के 1.59 लाख तथा एसटी वर्ग के 63 हजार से अधिक अभ्यर्थियों ने परीक्षा उत्तीर्ण की। दिव्यांग श्रेणी में भी हजारों छात्रों ने सफलता प्राप्त की।

परिणाम के आंकड़ों के अनुसार 138 अभ्यर्थियों ने 690 या उससे अधिक अंक हासिल किए, जबकि 19 छात्रों ने 700 से अधिक अंक प्राप्त किए। 650 या उससे अधिक अंक पाने वाले अभ्यर्थियों की संख्या लगभग 1,500 रही। वहीं 600 से अधिक अंक प्राप्त करने वाले 10 हजार से अधिक और 500 से अधिक अंक पाने वाले करीब 90 हजार अभ्यर्थी सफल हुए। यह दर्शाता है कि इस वर्ष भी परीक्षा का प्रतिस्पर्धा स्तर काफी ऊंचा रहा।

विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च अंक प्राप्त करने वाले छात्रों के बीच सरकारी मेडिकल कॉलेजों की सीटों के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिलेगी। हालांकि 650 से अधिक अंक पाने वाले अधिकांश छात्रों को अच्छे सरकारी मेडिकल कॉलेज मिलने की संभावना है। वहीं कम अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को राज्यवार कटऑफ और काउंसलिंग प्रक्रिया का इंतजार करना होगा।

एनटीए ने बताया कि परिणाम जारी होने के साथ ही मेडिकल प्रवेश की काउंसलिंग प्रक्रिया 22 जुलाई से शुरू होने की संभावना है। सफल अभ्यर्थियों को निर्धारित समय पर पंजीकरण कर अपने पसंदीदा मेडिकल कॉलेज और पाठ्यक्रम का चयन करना होगा। राज्य और अखिल भारतीय कोटा की काउंसलिंग अलग-अलग चरणों में आयोजित की जाएगी।

बिहार के छात्रों के शानदार प्रदर्शन ने एक बार फिर राज्य की शैक्षणिक क्षमता को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया है। अब सफल अभ्यर्थियों की नजरें काउंसलिंग और मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया पर टिकी हैं, जो उनके डॉक्टर बनने के सपने को नई दिशा देगी।


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