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सुपौल/खगड़िया: बिहार के चर्चित सुपौल MVI हत्याकांड में पुलिस ने बड़ा खुलासा करते हुए मोटर वाहन निरीक्षक (MVI) समिता कुमारी को उनके पति देवकुमार गुंजन की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का दावा है कि समिता ने अपने कथित प्रेमी अजीत कुमार के साथ मिलकर पति की हत्या की साजिश रची और सुपारी देकर वारदात को अंजाम दिलाया।

पुलिस के अनुसार, झारखंड के गोड्डा निवासी देवकुमार गुंजन 11 जून को जन साधारण एक्सप्रेस से अपनी पत्नी समिता से मिलने सुपौल जा रहे थे। यात्रा के दौरान खगड़िया जिले के मानसी थाना क्षेत्र के बालाघाट के पास अज्ञात हमलावरों ने उन्हें गोली मार दी। गंभीर रूप से घायल देवकुमार को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

शुरुआत में पुलिस को आशंका थी कि यह लूटपाट के दौरान हुई हत्या है, लेकिन जांच में सामने आया कि मृतक से कोई सामान नहीं लूटा गया था। इसी आधार पर रेल पुलिस अधीक्षक ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया।

करीब 34 दिनों की जांच के बाद पुलिस ने दावा किया कि हत्या के पीछे पारिवारिक विवाद और कथित प्रेम संबंध मुख्य वजह थे। जांच में सामने आया कि देवकुमार गुंजन, समिता कुमारी और अजीत कुमार ने एक साथ बिजली विभाग में नौकरी शुरू की थी। वर्ष 2018 में देवकुमार और समिता ने विवाह किया। बाद में समिता MVI बनकर सुपौल में तैनात हुईं, जबकि अजीत की पोस्टिंग नालंदा और देवकुमार की अन्य स्थान पर हो गई। इसी दौरान समिता और अजीत के बीच कथित रूप से नजदीकियां बढ़ीं।

पुलिस का आरोप है कि देवकुमार इस रिश्ते का विरोध कर रहे थे। इसके बाद समिता और अजीत ने उन्हें रास्ते से हटाने की योजना बनाई। जांच एजेंसियों के अनुसार, जहानाबाद निवासी राजू उर्फ सुधीर को चार लाख रुपये में हत्या की सुपारी दी गई, जिसमें 1.60 लाख रुपये एडवांस दिए गए। शूटर ने कई दिनों तक देवकुमार की रेकी की और वारदात को अंजाम दिया। पुलिस का यह भी दावा है कि घटना वाले दिन समिता अपने पति की लोकेशन अजीत के माध्यम से शूटर तक पहुंचा रही थीं।

पुलिस ने बताया कि पूछताछ में अजीत कुमार ने हत्या की साजिश में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है। मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच जारी है।

हालांकि, यह पुलिस जांच और आरोपों पर आधारित जानकारी है। मामले का अंतिम निर्णय अदालत में सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा। जब तक अदालत दोष सिद्ध नहीं करती, तब तक सभी आरोपी कानून की नजर में निर्दोष माने जाते हैं।


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