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मुजफ्फरपुर: दहेज हत्या के आरोप में जेल में बंद दरभंगा के जाले प्रखंड के निलंबित बीडीओ मनोज कुमार को अदालत से राहत नहीं मिली है। पत्नी अमृता कुमारी के श्राद्ध कार्यक्रम में शामिल होने के लिए दायर उनकी अर्जी को एसीजेएम-8 की अदालत ने सुनवाई के बाद खारिज कर दिया।

जानकारी के अनुसार, मनोज कुमार ने अदालत से 15 से 17 जुलाई तक पुलिस अभिरक्षा में जेल से बाहर जाकर पत्नी के श्राद्ध कर्म में शामिल होने की अनुमति मांगी थी। अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद उनकी याचिका स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

गौरतलब है कि 3 जुलाई की रात दरभंगा के मब्बी ओपी क्षेत्र के कन्हौली मोहल्ले में मनोज कुमार की पत्नी अमृता कुमारी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। घटना के बाद अमृता के भाई ने मनोज कुमार पर 10 लाख रुपये दहेज की मांग को लेकर हत्या करने का आरोप लगाया था।

मामले की जांच के दौरान पुलिस ने निलंबित बीडीओ मनोज कुमार और उनकी कथित प्रेमिका, जो एक महिला दारोगा हैं, को गिरफ्तार किया था। पूछताछ और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने मनोज कुमार को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। वहीं, महिला दारोगा को बाद में पीआर (पर्सनल रिकग्निजेंस) बॉन्ड पर रिहा कर दिया गया।

अभियोजन पक्ष ने अदालत में दलील दी कि आरोपी पर गंभीर आरोप हैं और ऐसे में श्राद्ध में शामिल होने की अनुमति देना उचित नहीं होगा। सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद अदालत ने आरोपी की अर्जी खारिज कर दी।

फिलहाल दहेज हत्या के इस चर्चित मामले की जांच जारी है। पुलिस साक्ष्य जुटाने और अन्य पहलुओं की जांच में लगी हुई है। मामले का अंतिम फैसला अदालत में सुनवाई और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर होगा। जब तक अदालत दोष सिद्ध नहीं करती, तब तक आरोपी कानून की नजर में निर्दोष माना जाता है।


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