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पटना। बिहार में अगले पंचायत चुनाव की दिशा तय करने वाला बड़ा फैसला राज्य कैबिनेट ने ले लिया है। सरकार ने बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 (यथासंशोधित) की विभिन्न धाराओं के तहत ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद क्षेत्रों के 2011 की जनगणना के आधार पर नए सिरे से गठन और परिसीमन को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही स्पष्ट हो गया है कि आगामी पंचायत चुनाव पुराने नहीं, बल्कि नए परिसीमन के आधार पर कराए जाएंगे। यह फैसला केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि बिहार के ग्रामीण राजनीतिक भूगोल को बदलने वाला कदम माना जा रहा है।

कैबिनेट के निर्णय के अनुसार अधिनियम की धारा 11, 12, 37 और 64 के तहत ग्राम पंचायत क्षेत्र, ग्राम पंचायत प्रादेशिक क्षेत्र, पंचायत समिति प्रादेशिक क्षेत्र और जिला परिषद प्रादेशिक क्षेत्र का गठन एवं परिसीमन 2011 की जनसंख्या के आंकड़ों के आधार पर किया जाएगा। इसके लिए संबंधित अधिसूचना के प्रारूप को भी मंजूरी दे दी गई है। अब सरकार चरणबद्ध तरीके से नए परिसीमन की प्रक्रिया पूरी करेगी, जिसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग चुनावी कार्यक्रम घोषित करने की दिशा में आगे बढ़ेगा।

इस फैसले का सबसे बड़ा असर ग्रामीण क्षेत्रों के चुनावी समीकरण पर पड़ेगा। कई पंचायतों की सीमाएं बदल सकती हैं, कुछ गांव नई पंचायतों में शामिल हो सकते हैं, जबकि कई वार्डों का पुनर्गठन होगा। पंचायत समिति और जिला परिषद क्षेत्रों का स्वरूप भी नए परिसीमन के अनुसार बदलेगा। ऐसे में कई जनप्रतिनिधियों का पारंपरिक चुनाव क्षेत्र बदल सकता है और संभावित उम्मीदवारों को भी अपनी नई राजनीतिक रणनीति बनानी होगी।

परिसीमन के साथ पंचायतों में आरक्षण व्यवस्था का नया खाका भी तैयार होगा। महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षित सीटों का निर्धारण भी नए परिसीमन और जनसंख्या के आधार पर किया जाएगा। इससे कई सीटों का आरक्षण बदलने की संभावना है, जिसका सीधा असर चुनावी राजनीति पर दिखाई देगा।

कैबिनेट की बैठक में पंचायत चुनाव की तैयारी के साथ पंचायतों को आर्थिक रूप से अधिक सक्षम बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। सरकार ने बिहार ग्राम पंचायत (कर, दर एवं शुल्क) नियमावली-2026 को मंजूरी दे दी है। इसके तहत ग्राम पंचायतों को अपने क्षेत्र में होल्डिंग, व्यवसाय, पेशा, हाट-बाजार और कुछ अन्य स्थानीय गतिविधियों पर कर एवं शुल्क लगाने का अधिकार मिलेगा। सरकार का मानना है कि इससे पंचायतों की अपनी आय बढ़ेगी और छोटी विकास योजनाओं के लिए उन्हें सरकारी अनुदान पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि पंचायत चुनाव से पहले परिसीमन को मंजूरी देना सरकार की चुनावी तैयारियों का सबसे अहम संकेत है। परिसीमन पूरा होने के बाद मतदाता सूची, वार्ड गठन, आरक्षण और चुनाव कार्यक्रम जैसी आगे की प्रक्रियाएं तेज होंगी। चूंकि आधार वर्ष 2011 की जनगणना को बनाया गया है, इसलिए पिछले डेढ़ दशक में आबादी और बसावट के स्वरूप में आए बदलावों को सीमित रूप से ही समायोजित किया जा सकेगा, लेकिन कानूनी प्रावधानों के अनुसार फिलहाल यही उपलब्ध आधिकारिक जनसंख्या आधार है।

ग्रामीण बिहार की राजनीति में पंचायत चुनाव सबसे व्यापक लोकतांत्रिक प्रक्रिया मानी जाती है, जिसमें लाखों मतदाता और हजारों उम्मीदवार भाग लेते हैं। ऐसे में कैबिनेट का यह फैसला केवल चुनाव कराने की तैयारी नहीं, बल्कि पंचायतों के प्रशासनिक ढांचे, प्रतिनिधित्व और स्थानीय शासन की नई रूपरेखा तय करने वाला निर्णय माना जा रहा है। अब सभी की नजर सरकार द्वारा परिसीमन प्रक्रिया की समय-सीमा और उसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग की चुनावी घोषणा पर रहेगी।


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