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पटना: बिहार में बकरीपालन को पारंपरिक आजीविका से आगे बढ़ाकर संगठित और लाभकारी ग्रामीण व्यवसाय बनाने की दिशा में पहल शुरू की गई है। इसी कड़ी में पशुपालन निदेशालय और गोट ट्रस्ट के बीच गैर-वित्तीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) हुआ है। इसका उद्देश्य राज्य के बकरीपालकों को वैज्ञानिक तरीके से बकरीपालन, बेहतर पशु स्वास्थ्य, प्रशिक्षण और संगठित बाजार से जोड़ना है।

समझौते के तहत बकरीपालकों को जागरूक और प्रशिक्षित करने के साथ उनकी उत्पादकता बढ़ाने पर काम किया जाएगा। साथ ही बकरी के दूध को भी संगठित डेयरी अर्थव्यवस्था से जोड़ने की योजना है। इसके लिए राज्य के विभिन्न प्रखंडों में बकरीपालकों को सहकारी समितियों के माध्यम से संगठित किया जा रहा है।

कार्यक्रम में बताया गया कि सुधा बूथों के माध्यम से बकरी के दूध की बिक्री की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इससे बकरीपालकों को अपने उत्पाद के लिए बेहतर बाजार मिल सकता है और उनकी आमदनी बढ़ाने में मदद मिलेगी।

एमओयू पर पशुपालन निदेशालय के निदेशक डॉ. दिनेश जौनपुरी और गोट ट्रस्ट के निदेशक ने हस्ताक्षर किए। मौके पर डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के मंत्री नंद किशोर यादव ने कार्यक्रम को संबोधित किया। सरकार का फोकस बकरीपालन को वैज्ञानिक प्रबंधन, प्रशिक्षण और बाजार व्यवस्था से जोड़कर ग्रामीण परिवारों के लिए आय का मजबूत स्रोत बनाने पर है।


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