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मधेपुरा: बिहार के मधेपुरा जिले के सिंहेश्वर थाना क्षेत्र के बूढ़ावे गांव में इन दिनों एक बच्चे को लेकर चर्चा तेज है। परिवार का दावा है कि जिस बच्चे को जन्म से अब तक बेटी के रूप में पाला गया, उसके शरीर में हाल के दिनों में ऐसे बदलाव दिखाई दिए हैं, जिसके बाद परिवार उसे बेटा बता रहा है। मामला सामने आने के बाद गांव में लोगों की भीड़ जुटने लगी और तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।

परिवार की ओर से इस बदलाव को धार्मिक आस्था से जोड़कर देखा जा रहा है। बच्चे की मां का कहना है कि उसकी बेटी बचपन से ही भगवान शिव की पूजा करती थी और शिव की प्रतिमाएं बनाया करती थी। मां भावुक होकर दावा कर रही है कि भोलेनाथ की कृपा से उसकी बेटी अब बेटा बन गई है। परिवार के मुताबिक, बच्चे के शरीर में बदलाव नजर आने के बाद उन्हें भी शुरुआत में इस पर विश्वास नहीं हुआ।

घटना की जानकारी गांव में फैलते ही बड़ी संख्या में लोग बच्चे को देखने पहुंचने लगे। लोगों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात को लेकर है कि आखिर बच्चे के शरीर में किस तरह का बदलाव हुआ है और इसके पीछे वास्तविक कारण क्या है।

हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक किसी व्यक्ति के शरीर में दिखाई देने वाले शारीरिक बदलाव को केवल धार्मिक मान्यता या स्थानीय चर्चाओं के आधार पर ‘लड़की से लड़का बनना’ नहीं कहा जा सकता। कुछ जन्मजात जैविक स्थितियों, हार्मोन से जुड़े बदलाव या किशोरावस्था के दौरान होने वाले शारीरिक परिवर्तनों के कारण शरीर में ऐसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जिन्हें सामान्य नजर से समझना मुश्किल होता है। इसलिए ऐसे मामलों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की जांच महत्वपूर्ण होती है।

मामले की सूचना मिलने के बाद सिंहेश्वर थाना पुलिस के मौके पर पहुंचकर जानकारी लेने की बात सामने आई है। इसके बाद बच्चे को चिकित्सकीय जांच के लिए भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई। अब पूरे मामले में मेडिकल जांच की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

दरअसल, बच्चे के शरीर में वास्तव में किस तरह का परिवर्तन हुआ है, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है। डॉक्टर जरूरत पड़ने पर शारीरिक परीक्षण के साथ अन्य चिकित्सकीय जांच के माध्यम से स्थिति का पता लगा सकते हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि मामला किसी प्राकृतिक जैविक बदलाव, हार्मोनल स्थिति, जन्मजात स्थिति या किसी अन्य चिकित्सकीय कारण से जुड़ा है।

फिलहाल बूढ़ावे गांव में यह मामला चर्चा का केंद्र बना हुआ है। लोग अपनी-अपनी तरह से इसकी व्याख्या कर रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञ जांच से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

परिवार की धार्मिक आस्था का सम्मान करते हुए भी इस मामले की वास्तविक स्थिति जानने के लिए वैज्ञानिक और चिकित्सकीय जांच जरूरी है। मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो सकेगा कि बच्चे के शरीर में किस प्रकार का बदलाव हुआ है और उसके पीछे वास्तविक कारण क्या है।


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