बारिश का मौसम आते ही मौसम सुहाना हो जाता है। गर्मी से राहत मिलती है, सड़कों पर पानी दिखाई देता है और लोग इस मौसम का आनंद लेने निकल पड़ते हैं। लेकिन इसी बारिश के बीच एक ऐसा विषय है, जिस पर अक्सर खुलकर बात नहीं होती—पीरियड्स के दौरान हाइजीन।
खासकर मानसून में लंबे समय तक नमी के संपर्क में रहने से असहजता, त्वचा में जलन और रैशेज जैसी परेशानियां बढ़ सकती हैं। इसलिए सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि पीरियड्स के दौरान कौन-सा प्रोडक्ट इस्तेमाल किया जाए, बल्कि सवाल यह भी है कि उसे कितनी देर इस्तेमाल किया जा रहा है और उसकी सफाई का कितना ध्यान रखा जा रहा है।
तो क्या बारिश के मौसम में सेनेटरी पैड के अलावा भी कोई विकल्प हैं?
सबसे पहले बात करते हैं मेंस्ट्रुअल कप की।
यह एक छोटा, लचीला कप होता है, जिसे शरीर के अंदर इस्तेमाल किया जाता है और यह मासिक धर्म के रक्त को इकट्ठा करता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह डिस्पोजेबल पैड की तरह बाहर की त्वचा पर लगातार नमी नहीं बनाए रखता।
लेकिन यहां एक जरूरी बात समझना भी जरूरी है। मेंस्ट्रुअल कप को इस्तेमाल करने से पहले और बाद में हाथ साफ होना चाहिए। कप को निर्माता के निर्देशों के अनुसार साफ करना जरूरी है। पहली बार इस्तेमाल करने वालों को सही तरीका किसी विश्वसनीय स्वास्थ्य विशेषज्ञ या निर्देश पुस्तिका से समझ लेना चाहिए।
दूसरा विकल्प है टैम्पोन।
टैम्पोन भी शरीर के अंदर इस्तेमाल किया जाने वाला पीरियड प्रोडक्ट है। यह उन लोगों के लिए सुविधाजनक हो सकता है जो खेलकूद या दूसरी शारीरिक गतिविधियों में सक्रिय रहते हैं।
लेकिन टैम्पोन को लंबे समय तक लगाए रखना ठीक नहीं है। इसे पैकेज पर दिए निर्देशों के अनुसार नियमित रूप से बदलना चाहिए। बहुत लंबे समय तक टैम्पोन लगाए रखने से गंभीर स्वास्थ्य समस्या का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए यहां सुविधा से ज्यादा जरूरी है—समय पर बदलना और सही तरीके से इस्तेमाल करना।
अब बात करते हैं पीरियड पैंटी की।
पीरियड पैंटी देखने में सामान्य अंडरवियर जैसी होती है, लेकिन इसमें ऐसी परतें होती हैं जो मासिक धर्म के रक्त को सोखने में मदद करती हैं। इसे धोकर दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है।
लेकिन मानसून में इसका इस्तेमाल करते समय एक बात सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है—पूरी तरह सूखना।
अगर कपड़ा अच्छी तरह सूखा नहीं है और उसे दोबारा पहन लिया गया, तो नमी और गर्म वातावरण त्वचा के लिए परेशानी पैदा कर सकता है। इसलिए धोने के बाद पीरियड पैंटी को अच्छी तरह सुखाना बेहद जरूरी है।
और अब उस सवाल पर लौटते हैं जिससे हमने शुरुआत की थी—क्या बारिश के मौसम में पैड पहनना सुरक्षित नहीं है?
ऐसा कहना सही नहीं होगा।
सेनेटरी पैड भी सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है। जरूरत यह है कि पैड को बहुत लंबे समय तक न पहना जाए, जरूरत के अनुसार बदला जाए और शरीर को साफ तथा सूखा रखा जाए। अगर पैड गीला हो गया है या असहज महसूस हो रहा है, तो उसे बदलना चाहिए।
एक और जरूरी बात—मानसून में बारिश में भीगने के बाद गीले कपड़े ज्यादा देर तक पहनकर न रहें। अंडरगारमेंट्स साफ और सूखे रखें। निजी हिस्से की सफाई के लिए सामान्य साफ पानी पर्याप्त हो सकता है; तेज खुशबू वाले साबुन या अनावश्यक इंटिमेट प्रोडक्ट त्वचा को परेशान कर सकते हैं।
और अगर पेशाब करते समय जलन, असामान्य खुजली, दर्द, बदबूदार या असामान्य डिस्चार्ज जैसी समस्या लगातार बनी रहती है, तो इसे सिर्फ मौसम का असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी से सलाह लेना बेहतर है।
क्योंकि पीरियड्स कोई बीमारी नहीं हैं। यह शरीर की एक सामान्य जैविक प्रक्रिया है।
जरूरत सिर्फ इतनी है कि इस दौरान सही जानकारी हो, सही प्रोडक्ट चुना जाए और साफ-सफाई का ध्यान रखा जाए।
बारिश का मौसम हो या गर्मी का—हाइजीन में लापरवाही किसी भी मौसम में ठीक नहीं।
इसलिए विकल्प आपके पास कई हैं—पैड, मेंस्ट्रुअल कप, टैम्पोन या पीरियड पैंटी। लेकिन सबसे जरूरी विकल्प है सही जानकारी।
क्योंकि जब जानकारी सही होगी, तभी चुनाव भी सही होगा।
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