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पटना: दिल्ली के कथित होटल कांड को लेकर बिहार की सियासत में घमासान बढ़ता जा रहा है। अब केंद्रीय मंत्री और LJP (रामविलास) प्रमुख चिराग पासवान ने इस मामले पर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि उन्हें नहीं पता कि दिल्ली होटल प्रकरण में कौन मंत्री शामिल है, लेकिन अगर ऐसा कोई नेता उनकी पार्टी का होता तो उसे सिर्फ मंत्री पद से हटाना ही नहीं, बल्कि पार्टी से भी बाहर कर दिया जाता। चिराग के इस बयान के बाद सवाल उठने लगा है कि अगर लगाए जा रहे आरोप सच साबित होते हैं तो बिहार सरकार के मंत्री और महुआ विधायक संजय कुमार सिंह के राजनीतिक भविष्य पर क्या असर पड़ेगा।

दरअसल, दिल्ली के एक होटल में महिला कर्मचारी के साथ कथित अभद्र व्यवहार से जुड़ा मामला इन दिनों बिहार की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस मामले को लेकर जनशक्ति जनता दल के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने सार्वजनिक तौर पर महुआ विधायक और बिहार सरकार के मंत्री संजय कुमार सिंह का नाम लिया था। तेज प्रताप ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग भी की थी।

तेज प्रताप की ओर से लगाए गए आरोपों के मुताबिक, दिल्ली के एक होटल में महिला कर्मचारी के साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया गया और मामले को दबाने के लिए कथित रूप से पैसों का लेन-देन हुआ। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक कोई स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

मामला सामने आने के बाद संजय कुमार सिंह ने आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनकी ओर से तेज प्रताप यादव को 50 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भी भेजा गया है। नोटिस में सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोपों को झूठा, आधारहीन और मानहानिकारक बताया गया है। साथ ही तेज प्रताप से आरोप वापस लेने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की गई है।

अब इस पूरे विवाद में चिराग पासवान की टिप्पणी ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है। चिराग का कहना है कि यदि उनकी पार्टी का कोई नेता इस तरह के मामले में शामिल पाया जाता, तो वह केवल मंत्री पद की कार्रवाई तक सीमित नहीं रहते, बल्कि संबंधित नेता को पार्टी से भी बाहर कर देते।

चिराग के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है कि यदि जांच में संजय सिंह पर लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं तो क्या बिहार सरकार या उनकी पार्टी भी इसी तरह की कार्रवाई करेगी?

फिलहाल तस्वीर साफ नहीं है। एक तरफ तेज प्रताप यादव गंभीर आरोप लगाकर जांच की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ संजय सिंह ने आरोपों को झूठा बताते हुए कानूनी रास्ता अपनाया है। ऐसे में पूरे मामले की सच्चाई सामने आने के लिए निष्पक्ष जांच अहम हो जाती है।

यानी अब असली सवाल यह है कि दिल्ली का कथित होटल कांड महज राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रहेगा या जांच के बाद इसकी कोई ठोस सच्चाई भी सामने आएगी?


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