नई दिल्ली: अक्सर यह माना जाता है कि दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों तक पहुंचने के लिए IIT जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं की डिग्री होना जरूरी है। लेकिन कर्नाटक के एक छोटे से गांव से निकलकर अपनी मेहनत और जुनून के दम पर Nvidia जैसी विश्व प्रसिद्ध कंपनी में करोड़ों रुपये के पैकेज तक पहुंचने वाले पृथ्वीराज ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म LinkedIn पर साझा की गई उनकी प्रेरणादायक कहानी इन दिनों तेजी से वायरल हो रही है। हजारों लोग उनकी सफलता को मेहनत, लगन और लगातार सीखते रहने की ताकत का बेहतरीन उदाहरण बता रहे हैं।
बैलगाड़ियों वाले गांव से कैलिफोर्निया तक का सफर
वायरल पोस्ट के मुताबिक, पृथ्वीराज का बचपन कर्नाटक के चित्रदुर्ग के पास स्थित एक छोटे से गांव में बीता। उस समय गांव में बैलगाड़ियां ही लोगों के आने-जाने का प्रमुख साधन थीं। सीमित संसाधनों और साधारण माहौल के बीच पले-बढ़े पृथ्वीराज ने बड़े सपने देखना कभी नहीं छोड़ा।
उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद बेंगलुरु स्थित PES University से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। उनके पास न तो IIT की डिग्री थी और न ही कोई विशेष पारिवारिक या आर्थिक सुविधा, लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया।
क्लासरूम से बाहर सीखने की आदत बनी सबसे बड़ी ताकत
LinkedIn पोस्ट के अनुसार, पृथ्वीराज ने सिर्फ कॉलेज की पढ़ाई तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने लगातार नई तकनीकों को सीखने, इंटर्नशिप करने, व्यक्तिगत प्रोजेक्ट्स बनाने और अपनी तकनीकी क्षमता को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया।
यही लगातार सीखने और खुद को निखारने की आदत उन्हें दूसरों से अलग बनाती गई। धीरे-धीरे उनके कौशल ने उन्हें दुनिया की सबसे बड़ी AI और चिप निर्माण कंपनियों में से एक Nvidia तक पहुंचा दिया।
अब Nvidia में कर रहे हैं दुनिया बदलने वाली तकनीक पर काम
पोस्ट में दावा किया गया है कि आज पृथ्वीराज अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित Nvidia मुख्यालय में कार्यरत हैं। उनकी सालाना सैलरी लगभग 2.6 करोड़ रुपये बताई गई है।
वह उन अत्याधुनिक चिप्स के विकास से जुड़े हैं जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक को शक्ति प्रदान करती हैं। आज दुनिया भर में AI के बढ़ते उपयोग के पीछे Nvidia की महत्वपूर्ण भूमिका है और पृथ्वीराज उसी टीम का हिस्सा हैं जो भविष्य की तकनीक तैयार कर रही है।
सफलता की असली पहचान डिग्री नहीं, मेहनत है
LinkedIn पोस्ट में कहा गया है कि किसी व्यक्ति की सफलता इस बात पर निर्भर नहीं करती कि उसने कहां से शुरुआत की, बल्कि इस पर निर्भर करती है कि उसने अपने लक्ष्य को पाने के लिए कितनी मेहनत, अनुशासन और निरंतर सीखने की भावना बनाए रखी।
पृथ्वीराज की कहानी इस बात का शानदार उदाहरण है कि यदि किसी में सीखने की इच्छा और मेहनत करने का जज्बा हो, तो वह किसी भी वैश्विक कंपनी तक अपनी पहचान बना सकता है।
सोशल मीडिया पर लोगों ने जमकर की तारीफ
यह प्रेरणादायक कहानी सोशल मीडिया पर हजारों लोगों को पसंद आ रही है। कई यूजर्स का कहना है कि यह उन छात्रों और युवाओं के लिए बड़ी प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं।
एक यूजर ने लिखा, "आज भी शिक्षा लाखों लोगों के लिए सामाजिक और आर्थिक स्थिति बदलने का सबसे बड़ा माध्यम है। AI के दौर में भी शिक्षा का महत्व कभी कम नहीं होगा।"
एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की, "यह कहानी साबित करती है कि सफलता आपके परिवार, कॉलेज या पृष्ठभूमि से नहीं, बल्कि आपकी मेहनत, सीखने की इच्छा और लगातार प्रयास से तय होती है। हर बड़े सपने देखने वाले छात्र के लिए यह गर्व और प्रेरणा की कहानी है।"
एक तीसरे यूजर ने लिखा, "आपका अतीत आपका भविष्य तय नहीं करता। निरंतर मेहनत, अनुशासन और सीखने की ललक आपको वहां तक पहुंचा सकती है, जहां तक आपने कभी कल्पना भी नहीं की होगी।"
युवाओं के लिए बड़ा संदेश
पृथ्वीराज की कहानी उन लाखों युवाओं के लिए उम्मीद की नई किरण है, जो यह सोचकर निराश हो जाते हैं कि बिना IIT, NIT या किसी बड़े संस्थान की डिग्री के वे वैश्विक कंपनियों तक नहीं पहुंच सकते।
यह सफलता बताती है कि आज के दौर में कंपनियां केवल डिग्री नहीं, बल्कि आपकी स्किल, समस्या सुलझाने की क्षमता, लगातार सीखने की आदत और मेहनत को सबसे ज्यादा महत्व देती हैं। अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और प्रयास ईमानदारी से किए जाएं, तो एक छोटे से गांव का युवा भी दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में अपनी जगह बना सकता है।
नोट: यह खबर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म LinkedIn पर वायरल एक पोस्ट में किए गए दावों पर आधारित है। पृथ्वीराज की पहचान, पद और ₹2.6 करोड़ वार्षिक वेतन के दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
नोट: यह खबर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म LinkedIn पर वायरल एक पोस्ट में किए गए दावों पर आधारित है। पृथ्वीराज की पहचान, पद और ₹2.6 करोड़ वार्षिक वेतन के दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
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