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| झारखंड की राजधानी रांची पहुंचे कन्हैया कुमार |
रांची: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कन्हैया कुमार ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) पेपर लीक समेत शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। झारखंड की राजधानी रांची में कांग्रेस के 'छात्रों की गूंज' अभियान के दौरान उन्होंने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है और अब छात्रों की आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर बुलंद करने का समय आ गया है।
कन्हैया कुमार ने कहा कि इस अभियान की शुरुआत राहुल गांधी द्वारा कोटा में छात्रों और शिक्षा व्यवस्था पर शुरू की गई चर्चा से हुई थी, जो अब देशव्यापी आंदोलन का रूप ले चुकी है। उनके मुताबिक, 'छात्रों की गूंज' अभियान के तहत देश के 28 शहरों में छात्रों से संवाद किया जा रहा है, ताकि उनकी समस्याओं और परेशानियों को सीधे सुना जा सके।
उन्होंने आरोप लगाया कि देशभर में लगातार पेपर लीक की घटनाएं हो रही हैं, परीक्षाएं समय पर नहीं हो रही हैं, विश्वविद्यालयों का शैक्षणिक सत्र अनियमित है, छात्रावासों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है और पढ़ाई पूरी करने के बाद भी युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा है। उनका कहना था कि इन सभी मुद्दों ने छात्रों के भविष्य को अनिश्चित बना दिया है।
कन्हैया कुमार ने कहा कि इस अभियान के जरिए छात्रों की समस्याओं और सुझावों को एकत्र कर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी तक पहुंचाया जाएगा, ताकि इन मुद्दों को संसद और राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाया जा सके। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस देश की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार चाहती है और इसके लिए लगातार छात्रों के बीच जाकर संवाद कर रही है।
इस दौरान उन्होंने 'छात्रों की गूंज' अभियान की तीन प्रमुख मांगें भी सामने रखीं। पहली मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और कथित पेपर लीक नेटवर्क के बीच संबंधों की जांच कराए जाने तथा उनके इस्तीफे की है। दूसरी मांग देशभर में पेपर लीक की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने और पारदर्शी एवं विश्वसनीय परीक्षा प्रणाली लागू करने की है। वहीं तीसरी मांग पूरे देश के लिए एक समान और समयबद्ध अकादमिक कैलेंडर लागू करने की है, ताकि छात्रों की पढ़ाई और परीक्षाएं तय समय पर पूरी हो सकें।
कन्हैया कुमार ने कहा कि यदि शिक्षा व्यवस्था में समय रहते सुधार नहीं किए गए तो इसका सबसे बड़ा नुकसान देश के करोड़ों छात्रों और युवाओं को उठाना पड़ेगा। उनका कहना था कि शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों को राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया जाना चाहिए।
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