भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे और महज 15 वर्षीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने रविवार को पहली बार विंबलडन का लाइव मुकाबला देखा। प्रतिष्ठित टेनिस टूर्नामेंट के फाइनल का रोमांच देखने पहुंचे वैभव ने अपनी पसंद भी खुलकर जाहिर की। उन्होंने कहा कि इस बार पूरे टूर्नामेंट में जैनिक सिनर का प्रदर्शन सबसे प्रभावशाली रहा है और उन्हें उम्मीद है कि वही खिताब अपने नाम करेंगे।
वैभव ने बताया कि वह लंबे समय से टेनिस के प्रशंसक रहे हैं और पिछले चार-पांच वर्षों से इस खेल को लगातार देखते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले उन्हें स्पेन के दिग्गज राफेल नडाल और सर्बिया के नोवाक जोकोविच का खेल बेहद पसंद था। अब नई पीढ़ी के खिलाड़ियों में जैनिक सिनर ने अपने शानदार प्रदर्शन से उन्हें काफी प्रभावित किया है।
युवा बल्लेबाज ने कहा कि विंबलडन जैसा बड़ा टूर्नामेंट स्टेडियम में बैठकर देखना अपने आप में एक खास अनुभव है। उनके अनुसार, किसी बड़े फाइनल में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को करीब से खेलते देखना सीखने का भी अच्छा अवसर होता है। उन्होंने कहा कि ऐसे बड़े मुकाबलों में खिलाड़ियों का आत्मविश्वास, मानसिक मजबूती और दबाव से निपटने का तरीका काफी कुछ सिखाता है।
वैभव ने यह भी कहा कि इस बार उन्होंने पूरे टूर्नामेंट पर नजर रखी और उन्हें लगा कि जैनिक सिनर ने लगातार शानदार प्रदर्शन किया है। इसी वजह से उन्होंने फाइनल में भी सिनर की जीत की उम्मीद जताई।
दूसरी ओर, हाल ही में भारतीय क्रिकेट टीम के साथ अपने शुरुआती अंतरराष्ट्रीय दौरे पर गए वैभव सूर्यवंशी को शुरुआती मुकाबलों में उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिल सकी। इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 श्रृंखला के पहले तीन मैचों में उन्होंने क्रमशः 15, 13 और 14 रन बनाए। विपक्षी गेंदबाजों ने उन्हें खास तौर पर शॉर्ट गेंदों से परेशान किया, जिसके कारण वह बड़ी पारी खेलने में सफल नहीं हो सके।
श्रृंखला के पांचवें और अंतिम टी-20 मुकाबले में टीम प्रबंधन ने बल्लेबाजी क्रम में बदलाव करते हुए वैभव की जगह अनुभवी विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन को मौका दिया। हालांकि, क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का अनुभव मिलना ही वैभव के लिए बड़ी उपलब्धि है और शुरुआती असफलताओं से उनके भविष्य का आकलन करना जल्दबाजी होगी।
भारतीय टीम के कप्तान श्रेयस अय्यर ने वैभव को अंतिम मुकाबले से बाहर रखने के फैसले पर सफाई देते हुए कहा कि टीम परिस्थितियों के अनुसार सर्वश्रेष्ठ संयोजन उतारना चाहती थी। उन्होंने बताया कि टीम प्रबंधन बाएं हाथ के बल्लेबाज अभिषेक शर्मा के साथ एक दाएं हाथ के ओपनर को आजमाना चाहता था। इसी रणनीति के तहत संजू सैमसन को मौका दिया गया।
श्रेयस अय्यर ने कहा कि टीम का उद्देश्य ऐसी बल्लेबाजी जोड़ी तैयार करना था जो मौजूदा परिस्थितियों में अधिक प्रभावी साबित हो सके। इसलिए यह फैसला किसी खिलाड़ी की क्षमता पर सवाल नहीं, बल्कि टीम संयोजन को ध्यान में रखकर लिया गया।
वैभव सूर्यवंशी के लिए यह दौर सीखने और अनुभव हासिल करने का है। महज 15 वर्ष की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और विंबलडन जैसे विश्वस्तरीय खेल आयोजनों का अनुभव उनके व्यक्तित्व और खेल दोनों को नई दिशा दे सकता है। क्रिकेट के साथ-साथ अन्य खेलों से प्रेरणा लेने की उनकी सोच यह दिखाती है कि वह खुद को हर स्तर पर बेहतर बनाने की कोशिश में जुटे हुए हैं। आने वाले समय में भारतीय क्रिकेट प्रेमियों की नजरें इस युवा प्रतिभा पर बनी रहेंगी।
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