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मधुबनी 12 जुलाई 2026 : मधुबनी में सरकारी पोखर की जमीन पर करोड़ों का खेल! तीन एकड़ भूमि घोटाले में 47 लोगों पर एफआईआर, अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में

मधुबनी: बिहार के मधुबनी जिले में सरकारी जमीन से जुड़े एक बड़े कथित भूमि घोटाले ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला मुख्यालय के तिलक चौक स्थित सरकारी पोखर (तालाब) की करीब तीन एकड़ जमीन को कथित रूप से रैयती भूमि दिखाकर उसकी खरीद-बिक्री, जमाबंदी और कब्जे का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। जांच के आधार पर इस मामले में 47 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, जबकि पूरे प्रकरण में संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है।

प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, रहिका अंचल के खाता संख्या-312 और खेसरा संख्या-89 में दर्ज यह भूमि सरकारी सैरात यानी तालाब की जमीन है। आरोप है कि वर्ष 2018 से 2022 के बीच इस सरकारी संपत्ति को रिकॉर्ड में रैयती भूमि मानते हुए कई लोगों के नाम जमाबंदी कर दी गई। इसी अवधि में बड़ी संख्या में जमीन की खरीद-बिक्री भी हुई, जिससे सरकारी संपत्ति पर निजी स्वामित्व का रास्ता तैयार हो गया।

 यही वह पोखर की जमीन है जिससे अवैध तरीके से बेच दिया गया है 


जांच में यह भी सामने आया कि आठ लोगों के नाम जमाबंदी दर्ज की गई, जबकि कुल 47 लोगों ने इस भूमि के क्रय-विक्रय से जुड़े दस्तावेज तैयार कराए। दिसंबर 2022 में हुई प्रशासनिक जांच में स्पष्ट हो गया कि संबंधित जमीन सरकारी पोखर की है। इसके बाद इस भूमि से जुड़े नए जमाबंदी आवेदन निरस्त कर दिए गए और पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू की गई।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि शहर के बीचों-बीच स्थित इस ऐतिहासिक तालाब को धीरे-धीरे मिट्टी डालकर समतल कर दिया गया। इसके बाद वहां चारदीवारी बनाकर मकान, दुकान और गैरेज जैसे निर्माण भी कर दिए गए। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये मूल्य की इस सरकारी जमीन पर कब्जा बिना प्रभावशाली लोगों और प्रशासनिक स्तर पर मिलीभगत के संभव नहीं था। यही कारण है कि अब जांच की आंच उन अधिकारियों तक भी पहुंच रही है, जिनके कार्यकाल में जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव किए गए।

तालाब संरक्षण से जुड़े सामाजिक संगठनों ने प्रशासन की कार्रवाई का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए तो न केवल सरकारी जमीन वापस हासिल की जा सकती है, बल्कि भविष्य में इस तरह के भूमि घोटालों पर भी रोक लगेगी। उन्होंने ऐतिहासिक जलस्रोतों को अतिक्रमण से मुक्त कराने की मांग भी दोहराई है।

फिलहाल जिला प्रशासन का कहना है कि मामला कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ रहा है और जांच के दौरान जो भी व्यक्ति या अधिकारी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। यह मामला अब केवल अवैध जमीन खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा, राजस्व रिकॉर्ड की पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही का भी बड़ा मुद्दा बन गया है।


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