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पटना 12 जुलाई 2026 : सुनील गावस्कर ने उठाए वैभव सूर्यवंशी के समर्थन में आवाज, बोले- हार के बाद भी युवा खिलाड़ी पर भरोसा दिखाना जरूरी

नई दिल्ली: इंग्लैंड दौरे पर भारतीय टीम का प्रदर्शन उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका और टीम को टी-20 सीरीज में हार का सामना करना पड़ा। लेकिन सीरीज खत्म होने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा किसी जीत या हार की नहीं, बल्कि 15 वर्षीय बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को अंतिम मुकाबले की प्लेइंग इलेवन से बाहर किए जाने की हो रही है। इस फैसले पर भारत के पूर्व कप्तान और महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने सवाल उठाते हुए कहा है कि युवा खिलाड़ियों को केवल कुछ पारियों के आधार पर परखना सही तरीका नहीं है।

गावस्कर का मानना है कि जब भारत सीरीज पहले ही गंवा चुका था, तब अंतिम मुकाबला एक युवा खिलाड़ी को अतिरिक्त अनुभव देने का बेहतर अवसर हो सकता था। उनके अनुसार, ऐसे समय में टीम प्रबंधन को भविष्य की तैयारी पर अधिक ध्यान देना चाहिए था। उन्होंने कहा कि वैभव जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी को शुरुआती संघर्ष के बाद बाहर करना उसके आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकता है।

इंग्लैंड के खिलाफ शुरुआती तीन मुकाबलों में वैभव सूर्यवंशी बड़ी पारी नहीं खेल सके। तेज गेंदबाजों की अतिरिक्त उछाल और गति के सामने उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ा, लेकिन क्रिकेट जानकारों का मानना है कि विदेशी परिस्थितियों में यह चुनौती किसी भी युवा बल्लेबाज के लिए स्वाभाविक होती है। ऐसे अनुभव ही आगे चलकर खिलाड़ियों को परिपक्व बनाते हैं।

सुनील गावस्कर ने यह भी संकेत दिया कि यदि टीम प्रबंधन अनुभवी बल्लेबाज संजू सैमसन को अंतिम मुकाबले में शामिल करना चाहता था, तो बल्लेबाजी क्रम में बदलाव कर दोनों खिलाड़ियों को साथ खिलाने की संभावना भी तलाश सकता था। उनके अनुसार, सीमित ओवरों के क्रिकेट में परिस्थितियों के अनुसार बल्लेबाजी क्रम में बदलाव करना कोई नई बात नहीं है।

वैभव सूर्यवंशी को भारतीय क्रिकेट का भविष्य माना जा रहा है। कम उम्र में घरेलू क्रिकेट और फ्रेंचाइजी क्रिकेट में उन्होंने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। यही वजह है कि क्रिकेट प्रेमियों की उम्मीदें भी उनसे काफी बढ़ गई हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी युवा खिलाड़ी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को स्थापित करने के लिए समय, धैर्य और लगातार अवसर की जरूरत होती है।

गावस्कर की टिप्पणी ने भारतीय क्रिकेट में युवा खिलाड़ियों के विकास को लेकर नई बहस छेड़ दी है। सवाल सिर्फ वैभव सूर्यवंशी का नहीं, बल्कि उस चयन नीति का भी है जिसमें प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को मौका तो मिलता है, लेकिन शुरुआती असफलताओं के बाद उन्हें तुरंत बाहर कर दिया जाता है।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय टीम प्रबंधन भविष्य में वैभव सूर्यवंशी जैसे युवा खिलाड़ियों के साथ किस तरह की रणनीति अपनाता है। क्रिकेट प्रशंसकों की भी यही उम्मीद है कि प्रतिभा को निखारने के लिए सिर्फ अवसर ही नहीं, बल्कि लगातार भरोसा भी दिया जाए, ताकि आने वाले वर्षों में भारत को मजबूत और आत्मविश्वासी खिलाड़ी मिल सकें।


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