पटना, 21 जुलाई। बिहार में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के तबादला प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने नई अंक-आधारित (पॉइंट सिस्टम) व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। अब शिक्षकों का स्थानांतरण किसी सिफारिश या व्यक्तिगत प्रभाव के बजाय तय मानकों के अनुसार दिए गए अंकों के आधार पर होगा। विभाग का कहना है कि इस नई व्यवस्था से ट्रांसफर प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और योग्य शिक्षकों को प्राथमिकता मिलेगी।
नई व्यवस्था के तहत ट्रांसफर के लिए कुल 100 अंकों का निर्धारण किया गया है। इन अंकों के आधार पर मेरिट सूची तैयार होगी और अधिक अंक पाने वाले शिक्षकों को पहले अपनी पसंद के जिले या विद्यालय का विकल्प मिलेगा। यदि दो शिक्षकों के अंक समान होते हैं तो अधिक आयु वाले शिक्षक को प्राथमिकता दी जाएगी।
बीमारी और दिव्यांगता को मिलेगा विशेष महत्व
शिक्षा विभाग ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए गंभीर बीमारी से पीड़ित शिक्षकों और दिव्यांग शिक्षकों के लिए अतिरिक्त अंक निर्धारित किए हैं। गंभीर बीमारी से जूझ रहे शिक्षक को 20 अंक दिए जाएंगे। वहीं, निर्धारित मानकों के अनुसार दिव्यांग शिक्षकों को 15 अंक मिलेंगे। इसके अलावा महिला शिक्षकों तथा पति-पत्नी दोनों के सरकारी सेवा में होने की स्थिति में भी निर्धारित प्रावधानों के तहत अतिरिक्त अंक दिए जाएंगे।
सेवा अवधि का भी मिलेगा लाभ
नई नीति में सेवा अनुभव को भी महत्व दिया गया है। 31 मार्च तक की सेवा अवधि के आधार पर प्रत्येक वर्ष के लिए एक अंक दिया जाएगा। यानी लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को भी ट्रांसफर प्रक्रिया में लाभ मिलेगा। इससे अनुभवी शिक्षकों को उचित अवसर मिलने की उम्मीद है।
रिक्त पदों के आधार पर होगा आवंटन
मेरिट सूची तैयार होने के बाद जिन शिक्षकों के अंक अधिक होंगे, उन्हें पहले उपलब्ध रिक्त पदों में से विद्यालय या जिले का चयन करने का अवसर मिलेगा। कम अंक वाले शिक्षकों का समायोजन बाद में उपलब्ध रिक्तियों के अनुसार किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी और आवेदन से लेकर दस्तावेजों के सत्यापन तक सभी कार्य डिजिटल माध्यम से किए जाएंगे।
डिजिटल प्रोफाइल से होगा सत्यापन
शिक्षकों को अपनी सेवा संबंधी जानकारी, नियुक्ति विवरण और अन्य आवश्यक दस्तावेज डिजिटल प्रोफाइल पर उपलब्ध कराने होंगे। विभाग इन्हीं रिकॉर्ड के आधार पर अंक निर्धारित करेगा। इससे फर्जी दावों या अनावश्यक हस्तक्षेप की संभावना भी कम होगी।
शिक्षा विभाग का उद्देश्य
शिक्षा विभाग का मानना है कि नई अंक-आधारित व्यवस्था से ट्रांसफर प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और विवाद-मुक्त बनेगी। लंबे समय से ट्रांसफर में सिफारिश और मनमानी के आरोप लगते रहे हैं। अब डिजिटल प्रणाली और स्पष्ट मानकों के जरिए इन शिकायतों पर रोक लगाने का प्रयास किया गया है।
नई व्यवस्था से विशेष रूप से गंभीर बीमारी, दिव्यांगता और पारिवारिक परिस्थितियों से जूझ रहे शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही मेरिट आधारित प्रणाली लागू होने से शिक्षकों का विश्वास भी बढ़ेगा और विभागीय प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक प्रभावी तथा जवाबदेह बन सकेगी।
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