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सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट पर अब सख्ती, बिहार में एक साल तक की जेल का प्रावधान

पटना | विशेष संवाददाता

बिहार सरकार ने डिजिटल अपराधों, सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक गतिविधियों और पेपर लीक जैसे मामलों पर कठोर कार्रवाई की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इनमें सबसे प्रमुख निर्णय बिहार अपराध नियंत्रण अधिनियम (सीसीए) में संशोधन तथा 132 वर्ष पुराने जेल कानून को समाप्त कर नए सुधारात्मक कानून को लागू करने का है।

कैबिनेट के फैसले के अनुसार अब सोशल मीडिया पर अभद्र, अश्लील, अपमानजनक या समाज में वैमनस्य फैलाने वाली टिप्पणियां और पोस्ट करने वालों पर सीधे सीसीए के तहत कार्रवाई की जा सकेगी। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर छह महीने से लेकर एक वर्ष तक की सजा का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि डिजिटल माध्यमों के बढ़ते दुरुपयोग को रोकने और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक कराने या उससे जुड़े नेटवर्क का हिस्सा बनने वालों पर भी अब सख्त कार्रवाई होगी। आर्थिक अपराध और साइबर अपराध से जुड़े मामलों को भी नए कानून के तहत अधिक प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जाएगा। प्रशासन का मानना है कि इससे संगठित अपराध और ऑनलाइन अपराधों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

कैबिनेट ने बिहार जेल मैनुअल एवं पुराने जेल कानूनों को समाप्त कर बिहार कारा एवं सुधारात्मक सेवा विधेयक, 2026 को मंजूरी दी है। इसके साथ ही वर्ष 1900 का प्रिजनर्स एक्ट, 1950 का ट्रांसफर ऑफ प्रिजनर्स एक्ट और 1984 का प्रिजन एक्ट राज्य में समाप्त हो जाएंगे। नया कानून जेलों को केवल दंडात्मक संस्था के बजाय सुधारात्मक केंद्र के रूप में विकसित करने की अवधारणा पर आधारित होगा।

बैठक में शिक्षा और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले भी लिए गए। मुजफ्फरपुर में शहीद जुब्बा सहनी वास्तुकला एवं आधुनिक अभियंत्रण विश्वविद्यालय की स्थापना को मंजूरी दी गई। यहां सिविल इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर और आधुनिक तकनीकी विषयों की पढ़ाई होगी। साथ ही एआई और कंप्यूटर विज्ञान के क्षेत्र में विशेष शिक्षा एवं अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए नए संस्थान स्थापित किए जाएंगे।

पूर्व सैनिकों के लिए भी सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। वनरक्षी (फॉरेस्ट गार्ड) की सीधी भर्ती में पूर्व सैनिकों के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा सरकारी मॉडल स्कूलों में नौवीं से बारहवीं तक पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए विशेष यूनिफॉर्म सहायता योजना को भी मंजूरी दी गई।

सरकार का कहना है कि इन फैसलों का उद्देश्य कानून-व्यवस्था को मजबूत करना, डिजिटल अपराधों पर नियंत्रण, जेल सुधार, शिक्षा के क्षेत्र में नई संभावनाओं का विकास और पूर्व सैनिकों के पुनर्वास को बढ़ावा देना है। हालांकि सोशल मीडिया से जुड़े नए प्रावधानों को लेकर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून के दुरुपयोग की आशंकाओं पर भी बहस शुरू हो गई है। अब इन नए प्रावधानों के लागू होने के बाद इनके प्रभाव और क्रियान्वयन पर सभी की नजर रहेगी।


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