thedailybihar.com


10वीं पास युवक का कमाल: लकड़ी और लोहे से बना दिया इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर, 50 हजार में तैयार किया अनोखा मॉडल :  कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों तो सीमित संसाधन भी बड़ी उपलब्धि की राह नहीं रोक सकते। उत्तर प्रदेश के बिजनौर के रहने वाले 23 वर्षीय अली कुमैल ने इस कहावत को सच साबित कर दिखाया है। महज 10वीं तक पढ़ाई करने वाले और पेशे से एसी मैकेनिक अली ने अपनी मेहनत, हुनर और देसी जुगाड़ से ऐसा इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर तैयार किया है, जिसकी चर्चा अब पूरे देश में हो रही है। खास बात यह है कि इस ट्रैक्टर को बनाने में उन्होंने करीब 40 प्रतिशत लकड़ी और 60 प्रतिशत लोहे का इस्तेमाल किया है।

आर्थिक तंगी के कारण अली कुमैल को 10वीं के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी। परिवार की जिम्मेदारियों को संभालने के लिए उन्होंने एसी रिपेयरिंग का काम शुरू किया। हालांकि, उनके मन में हमेशा कुछ अलग और नया करने की चाह बनी रही। बचपन से ही मशीनों के प्रति रुचि रखने वाले अली खाली समय में नए-नए प्रयोग करते रहते थे। आखिरकार उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई से बचाए गए करीब 50 हजार रुपये जुटाए और इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर बनाने का सपना साकार कर दिया।

इस अनोखे ट्रैक्टर को तैयार करने में अली ने कई महीनों तक दिन-रात मेहनत की। उन्होंने बाजार में उपलब्ध महंगे उपकरणों के बजाय पुराने और उपयोगी सामान का इस्तेमाल किया। ट्रैक्टर में पुरानी लिथियम-आयन बैटरियां लगाई गई हैं, जो इसे कम खर्च में बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करती हैं। ट्रैक्टर में कुल चार बैटरियां लगी हैं, जिन्हें पूरी तरह चार्ज होने में लगभग दो से चार घंटे का समय लगता है।

एक बार फुल चार्ज होने के बाद यह इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर करीब 60 किलोमीटर तक चल सकता है। खेती से जुड़े छोटे-मोटे कार्यों के अलावा यह सामान्य परिवहन कार्यों में भी उपयोगी साबित हो सकता है। कम लागत और पर्यावरण के अनुकूल तकनीक के कारण लोग इस ट्रैक्टर की खूब सराहना कर रहे हैं।

अली कुमैल का यह नवाचार सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग उनके हुनर और जज्बे की जमकर तारीफ कर रहे हैं। कई लोग इसे देसी इनोवेशन का बेहतरीन उदाहरण बता रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र में रहकर सीमित संसाधनों के बावजूद इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल करना युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है।

अली का कहना है कि अगर उन्हें सरकार या किसी संस्था का सहयोग मिले तो वह इस मॉडल को और बेहतर बना सकते हैं। उनका सपना है कि कम लागत वाले इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर किसानों तक पहुंचें, ताकि खेती की लागत कम हो और पर्यावरण को भी नुकसान न पहुंचे।

अली कुमैल की कहानी यह साबित करती है कि सफलता केवल बड़ी डिग्रियों से नहीं, बल्कि मेहनत, लगन और नए सोच से मिलती है। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने जो कर दिखाया, वह देश के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है। उनका यह देसी जुगाड़ न केवल तकनीकी नवाचार का उदाहरण है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी सपना हकीकत में बदला जा सकता है।


आप भी अपने गांव की समस्या घटना से जुड़ी खबरें हमें 7870192482 पर भेज सकते हैं...



Previous Post Next Post