नई दिल्ली। प्याज की लगातार बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने नासिक से देश के प्रमुख शहरों तक विशेष ट्रेनों के जरिए प्याज भेजना शुरू कर दिया है। ‘कांदा एक्सप्रेस’ के माध्यम से उन शहरों में प्याज की अतिरिक्त आपूर्ति की जाएगी, जहां खुदरा कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। इसके साथ ही बफर स्टॉक से भी सस्ती दर पर प्याज बाजार में उतारने का फैसला किया गया है।
उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे के अनुसार, शुरुआती चरण में कांदा एक्सप्रेस के जरिए दिल्ली, चेन्नई, मदुरै, एर्नाकुलम और गुवाहाटी में प्याज पहुंचाया जाएगा। उम्मीद है कि बुधवार तक इन शहरों में तय वितरण केंद्रों पर प्याज की खेप पहुंच जाएगी। इसके बाद बाजार की स्थिति और मांग को देखते हुए दूसरे शहरों में भी विशेष ट्रेनों के माध्यम से प्याज की आपूर्ति बढ़ाई जा सकती है।
सरकार का मुख्य उद्देश्य उन इलाकों में प्याज की उपलब्धता बढ़ाना है, जहां कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। अतिरिक्त आपूर्ति के जरिए बाजार में प्याज की कमी की आशंका को कम करने और कीमतों पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।
दिल्ली-एनसीआर में 35 रुपये किलो प्याज
सरकार ने बफर स्टॉक में रखे प्याज को भी चरणबद्ध तरीके से कम कीमत पर बाजार में उतारने का निर्णय लिया है। फिलहाल दिल्ली-एनसीआर में चुनिंदा उपभोक्ता केंद्रों के माध्यम से प्याज 35 रुपये प्रति किलो की दर से उपलब्ध कराने की योजना है। सरकार के मुताबिक, जरूरत के अनुसार ऐसे केंद्रों की संख्या और आपूर्ति बढ़ाई जा सकती है।
उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने कहा कि देश में प्याज की पर्याप्त उपलब्धता है। उन्होंने कीमतों में अचानक बढ़ोतरी के पीछे सट्टेबाजी को भी एक कारण बताया। सरकार के अनुसार नासिक की मंडियों में प्याज का भाव दिल्ली के मुकाबले अधिक देखा जा रहा है। ऐसे में सरकार उत्पादन क्षेत्रों से खपत वाले बड़े शहरों तक तेजी से प्याज पहुंचाकर कीमतों को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में प्याज की खुदरा कीमतों में 59 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। इसी वजह से सरकार ने बाजार की स्थिति पर निगरानी बढ़ा दी है और आपूर्ति बढ़ाने के लिए कई स्तरों पर कदम उठाए हैं।
गेहूं और उसके उत्पादों के निर्यात पर रोक हटी
इसी बीच केंद्र सरकार ने गेहूं और उसके विभिन्न उत्पादों के निर्यात पर लगी रोक भी तत्काल प्रभाव से हटा दी है। भारत ने घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से मई 2022 में गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया था। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद वैश्विक गेहूं आपूर्ति पर भी असर पड़ा था।
विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) के मुताबिक अब गेहूं के आटे, मैदा, सूजी और साबुत गेहूं के आटे समेत कई उत्पादों के निर्यात पर लगी रोक हटाई गई है। भारत दुनिया के प्रमुख गेहूं उत्पादक देशों में शामिल है। निर्यात प्रतिबंध हटने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय गेहूं और उसके उत्पादों की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है।
एक तरफ सरकार प्याज की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण के लिए घरेलू बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति कर रही है, वहीं दूसरी ओर गेहूं निर्यात पर रोक हटाकर कृषि उत्पादों के वैश्विक कारोबार के लिए रास्ता खोल रही है। आने वाले दिनों में इन फैसलों का असर बाजार की कीमतों और किसानों को मिलने वाले दाम पर भी दिखाई दे सकता है।
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