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इंफाल। जब सरकारी व्यवस्था किसी दूरदराज इलाके तक सड़क नहीं पहुंचा पाई, तब एक IAS अधिकारी ने लोगों को साथ लेकर ऐसा काम कर दिखाया, जिसकी मिसाल आज भी दी जाती है। मणिपुर के तौसेम क्षेत्र में तैनात रहे IAS अधिकारी आर्मस्ट्रांग पामे ने ग्रामीणों की मुश्किलों को देखते हुए सड़क निर्माण की पहल की।

तौसेम इलाके के कई गांवों तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों को बेहद कठिन रास्तों से गुजरना पड़ता था। गंभीर रूप से बीमार लोगों को अस्पताल ले जाना भी बड़ी चुनौती थी। नदी पार करने और लंबा पैदल सफर तय करने में करीब पांच घंटे तक लग जाते थे।

हालात देखकर पामे ने इंतजार करने के बजाय खुद पहल करने का फैसला किया। उन्होंने अपनी बचत से 5 लाख रुपये सड़क निर्माण के लिए लगाए और लोगों से सहयोग की अपील की। उनकी अपील का असर हुआ और अलग-अलग जगहों से मदद मिलने लगी। देखते ही देखते करीब 40 लाख रुपये जुट गए।

इसके बाद स्थानीय ग्रामीण भी इस मुहिम का हिस्सा बन गए। करीब 250 लोगों ने श्रमदान किया, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं। किसी ने श्रम दिया तो किसी ने निर्माण सामग्री और दूसरी जरूरतों में सहयोग किया। सामूहिक प्रयास का नतीजा यह रहा कि करीब 100 किलोमीटर लंबी सड़क तैयार हो गई।

यह सड़क केवल रास्ता नहीं थी, बल्कि उन गांवों के लिए विकास और बेहतर संपर्क की नई उम्मीद बन गई। सड़क बनने से अस्पताल, बाजार और दूसरे जरूरी स्थानों तक पहुंच आसान हुई। इसी असाधारण पहल के कारण आर्मस्ट्रांग पामे को लोगों के बीच ‘मिरेकल मैन’ के नाम से पहचान मिली।

यह कहानी बताती है कि पद और सरकारी संसाधनों से ज्यादा महत्वपूर्ण कई बार किसी काम को शुरू करने का साहस और लोगों का भरोसा होता है।


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