पटना: बिहार में औद्योगिक विकास को नई गति देने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की मौजूदगी में गुरुवार को उद्योग विभाग और देश के 10 प्रमुख औद्योगिक समूहों के बीच कुल 51,600 करोड़ रुपये के निवेश संबंधी समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। सरकार का दावा है कि इस निवेश से बिहार देश का नया स्टील हब बनने की ओर बढ़ेगा।
सरकार के अनुसार, प्रस्तावित निवेश का सबसे बड़ा हिस्सा स्टील और ऊर्जा क्षेत्र में होगा। इसके अलावा न्यूक्लियर एनर्जी, टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग और फार्म सेक्टर में भी बड़े निवेश की तैयारी की जा रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार अब केवल कृषि आधारित राज्य नहीं रहेगा, बल्कि औद्योगिक विकास के नए केंद्र के रूप में उभरेगा। उन्होंने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार उद्योगों की स्थापना के लिए हर संभव सहयोग और बेहतर माहौल उपलब्ध कराएगी।
एमओयू पर हस्ताक्षर करने वाली प्रमुख कंपनियों में ग्रेस (ग्लोबल रिन्यूएबल एनर्जी), नविन आयरन एंड स्टील, अंकुर स्टील, श्री लांका बाबा मेटल्स एंड पावर, श्याम स्टील मैन्युफैक्चरिंग, शाकंभरी इस्पात एंड पावर, श्री साई स्टील, फिनटेक पावर, भारत साइंस एंड इनोवेशन तथा अग्रगण एक्सप्लोस शामिल हैं।
सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के लागू होने से राज्य में बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और दूसरे राज्यों की ओर होने वाले पलायन में कमी आएगी। साथ ही बिजली उत्पादन, स्टील निर्माण और औद्योगिक आधार मजबूत होने से बिहार की अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी।
राज्य सरकार ने इसे "बिल्ड एंड बिलीव इन बिहार" अभियान का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया है। अधिकारियों का कहना है कि निवेश प्रस्तावों को जल्द धरातल पर उतारने के लिए आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा किया जाएगा, ताकि बिहार औद्योगिक विकास के नए दौर में प्रवेश कर सके।
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