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 वैभव सूर्यवंशी और क्रिकेट एक्सपर्ट हर्ष भोगले 

नई दिल्ली : भारतीय क्रिकेट टीम के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को शुरुआती तीन मुकाबलों के बाद टीम से बाहर किए जाने पर मशहूर क्रिकेट कमेंटेटर हर्षा भोगले ने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि किसी युवा खिलाड़ी को इतनी जल्दी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौका देकर फिर शुरुआती असफलताओं के आधार पर बाहर कर देना सही रणनीति नहीं हो सकती।

हर्षा भोगले ने कहा कि वह चयनकर्ताओं की दीर्घकालिक योजना को लेकर उलझन में हैं। उनके अनुसार, महज 15 वर्ष की उम्र में वैभव सूर्यवंशी ने आईपीएल में शानदार प्रदर्शन कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया था, लेकिन इंग्लैंड जैसी कठिन परिस्थितियों में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलना बिल्कुल अलग चुनौती है। ऐसे में युवा खिलाड़ी से हर मैच में बेहतरीन प्रदर्शन की उम्मीद करना उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि वैभव शुरुआती तीन पारियों में शॉर्ट गेंदों के खिलाफ संघर्ष करते नजर आए और 14, 13 तथा 15 रन ही बना सके। लेकिन अगर टीम प्रबंधन के पास उन्हें कठिन दौर से निकालने का धैर्य नहीं था, तो फिर इतनी कम उम्र में उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में मौका देने का फैसला क्यों लिया गया? उनका मानना है कि केवल तीन मैचों के बाद टीम से बाहर करना युवा खिलाड़ी के आत्मविश्वास पर नकारात्मक असर डाल सकता है।

भोगले ने यह भी कहा कि जोफ्रा आर्चर जैसे विश्वस्तरीय तेज गेंदबाजों के सामने किसी किशोर बल्लेबाज को उतारना अपने आप में बड़ी परीक्षा होती है। ऐसे खिलाड़ियों को समय, भरोसा और लगातार अवसर देने की जरूरत होती है, ताकि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर की चुनौतियों के अनुरूप खुद को ढाल सकें।

उन्होंने संकेत दिया कि असाधारण प्रतिभा वाले खिलाड़ियों के विकास के लिए लंबी सोच जरूरी है। बार-बार टीम में शामिल करना और फिर तुरंत बाहर कर देना न सिर्फ खिलाड़ी के लिए, बल्कि चयन प्रक्रिया की स्पष्टता पर भी सवाल खड़े करता है। हर्षा भोगले की यह टिप्पणी अब क्रिकेट जगत में चर्चा का विषय बन गई है।


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