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पटना। बिहार के लाखों जमीन मालिकों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य के निबंधन विभाग ने रजिस्ट्री से जुड़े पुराने दस्तावेजों को डिजिटल बनाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंचा दी है। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद लोगों को अपनी जमीन की रजिस्ट्री की कॉपी लेने के लिए बार-बार निबंधन कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। वे घर बैठे ऑनलाइन पोर्टल से दस्तावेज डाउनलोड कर उनका प्रिंट निकाल सकेंगे।

विभाग के अनुसार, परियोजना के पहले चरण में वर्ष 1990 से 1995 तक के रजिस्ट्री दस्तावेजों को डिजिटल कर पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। इसके बाद दूसरे चरण में 1908 से 1989 तक के ऐतिहासिक रिकॉर्ड भी ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाएंगे।

इस पहल का उद्देश्य जमीन से जुड़े रिकॉर्ड को सुरक्षित रखना, दस्तावेजों की उपलब्धता आसान बनाना और आम लोगों का समय व खर्च बचाना है। डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से दस्तावेज खोने या खराब होने की समस्या भी काफी हद तक खत्म हो जाएगी।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद लोग राज्य के किसी भी हिस्से से या देश के किसी भी स्थान पर रहते हुए ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपनी रजिस्ट्री की प्रति डाउनलोड कर सकेंगे। इससे जमीन खरीद-बिक्री, बैंक लोन, कानूनी प्रक्रिया और अन्य प्रशासनिक कार्यों में भी काफी सुविधा मिलेगी।

निबंधन विभाग का मानना है कि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण से पारदर्शिता बढ़ेगी और दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया भी पहले से अधिक तेज और आसान होगी। विभाग इस परियोजना को जल्द शुरू करने की तैयारी में जुटा है।


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