पटना: बिहार में अब जमीन के दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए लोगों को 200 रुपये शुल्क देना होगा। राज्य सरकार ने इस व्यवस्था को लागू करने के लिए बिहार भूमि दाखिल-खारिज (संशोधन) विधेयक, 2026 विधानसभा में पेश किया है। प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य राजस्व संग्रह बढ़ाना और दाखिल-खारिज प्रक्रिया को कानूनी रूप से अधिक व्यवस्थित बनाना बताया जा रहा है।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अनुसार, वर्तमान में दाखिल-खारिज के लिए किसानों और अन्य आवेदकों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता है। हालांकि, बिहार भूमि अधिनियम, 2011 की धारा 17 के तहत दाखिल-खारिज, अपील और पुनरीक्षण से जुड़े मामलों में न्यायालय शुल्क स्टांप लगाने का प्रावधान पहले से मौजूद है। अब सरकार इस व्यवस्था को संशोधित करते हुए प्रत्येक दाखिल-खारिज आवेदन पर 200 रुपये का निर्धारित शुल्क लेने की तैयारी कर रही है।
सरकार का कहना है कि बिहार एक लोककल्याणकारी राज्य है और विकास योजनाओं तथा प्रशासनिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए राजस्व बढ़ाना जरूरी है। इसी उद्देश्य से यह संशोधन प्रस्ताव लाया गया है। विभाग का मानना है कि शुल्क से मिलने वाली अतिरिक्त आय का उपयोग भूमि प्रशासन को और अधिक प्रभावी बनाने में किया जा सकेगा।
हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। कुछ लोगों का मानना है कि शुल्क से सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी, जबकि किसान संगठनों और विपक्ष का तर्क है कि छोटे और सीमांत किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं डाला जाना चाहिए।
यदि यह विधेयक विधानसभा से पारित हो जाता है, तो राज्य में जमीन के दाखिल-खारिज के प्रत्येक नए आवेदन पर 200 रुपये का शुल्क अनिवार्य रूप से देना होगा। सरकार की ओर से इसके लागू होने की तिथि और विस्तृत दिशा-निर्देश अधिसूचना जारी होने के बाद स्पष्ट किए जाएंगे।
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