पटना। बिहार के गन्ना किसानों और चीनी उद्योग के लिए बड़ी खबर है। राज्य में बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से सक्रिय करने और नई आधुनिक चीनी मिलें स्थापित करने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। कैबिनेट ने रैयाम और सकरी में नई सहकारी चीनी मिलें स्थापित करने की मंजूरी दे दी है। दोनों परियोजनाओं का शिलान्यास 20 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए जाने की जानकारी दी गई है।
रैयाम और सकरी में करीब 30 वर्षों से बंद पड़ी चीनी मिलों की जमीन पर आधुनिक सुविधाओं से लैस नई इकाइयां विकसित की जाएंगी। इन परियोजनाओं के संचालन की जिम्मेदारी इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL) को दी जाएगी। दोनों मिलों में लगभग 2,000 करोड़ रुपये का निवेश होने की उम्मीद है। इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 2,000 युवाओं को रोजगार मिलने की संभावना है।
नई चीनी मिलों का सबसे बड़ा फायदा मिथिलांचल के गन्ना किसानों को मिलने की उम्मीद है। मिलों के शुरू होने से स्थानीय स्तर पर गन्ने की खरीद बढ़ेगी, जिससे किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध होगा। सरकार को उम्मीद है कि इससे किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
इन परियोजनाओं में चीनी के साथ-साथ इथेनॉल और को-जनरेशन पावर के उत्पादन की भी योजना है। इससे चीनी उद्योग को अतिरिक्त आय के स्रोत मिलेंगे और ऊर्जा उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा।
राज्य सरकार ने अगले पांच वर्षों में बिहार में 25 नई चीनी मिलें स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। इसकी शुरुआत रैयाम और सकरी से होगी। सरकार का मानना है कि चीनी उद्योग के विस्तार से किसानों, युवाओं और स्थानीय अर्थव्यवस्था—तीनों को लाभ मिलेगा।
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