देशभर में छात्रों के आंदोलन और उनके साथ हुई कथित सख्ती को लेकर अब फिल्म और साहित्य जगत की कई चर्चित हस्तियों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। अभिनेता दिलजीत दोसांझ, प्रीति जिंटा, रितेश देशमुख, रणवीर शौरी और लेखक चेतन भगत ने सार्वजनिक रूप से छात्रों के प्रति सहानुभूति जताते हुए सरकार और प्रशासन से उनकी बात सुनने की अपील की है।
अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने कहा कि छात्रों के साथ जिस तरह का व्यवहार हुआ, वह गलत था। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुना जाए। दिलजीत ने कहा कि जनता की आवाज ही लोकतंत्र की असली ताकत होती है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें पहले भी "एंटी नेशनल" कहा गया था और अब भी ऐसे आरोप लगाए जाएंगे, लेकिन वह अपनी बात रखने से पीछे नहीं हटेंगे। किसान आंदोलन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उस दौरान भी उन्हें विरोध और कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ा था।
वहीं अभिनेत्री प्रीति जिंटा ने आंदोलन का नेतृत्व कर रहीं सोनम वांगचुक से अनशन समाप्त करने की अपील की। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार और छात्र संगठनों के बीच सार्थक बातचीत शुरू होगी। प्रीति ने कहा कि छात्रों का संघर्ष देश और युवाओं के भविष्य के लिए है और उनकी सेहत भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी उनकी लड़ाई।
अभिनेता रितेश देशमुख ने युवाओं को देश का भविष्य बताते हुए कहा कि उनकी आवाज सुनी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत उसके नागरिक होते हैं और युवाओं के सपनों और ऊर्जा से ही बेहतर भारत का निर्माण संभव है। उन्होंने लोगों से छात्रों का साथ देने और उनकी बात समझने की अपील की।
अभिनेता रणवीर शौरी ने इस पूरे मामले में सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा मंत्री पहले ही जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे देते, तो सरकार अपनी साख बचा सकती थी और जवाबदेही का संदेश भी जाता। उन्होंने यह भी कहा कि अब सरकार के लिए बिना राजनीतिक नुकसान के इस विवाद से निकलना आसान नहीं होगा।
प्रसिद्ध लेखक चेतन भगत ने भी छात्रों के प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं के साथ हिंसा की तस्वीरें देखकर उन्हें दुख हुआ। उन्होंने कहा कि छात्रों की चिंताएं वास्तविक और जायज हैं। चेतन भगत के अनुसार समस्या प्रदर्शनकारी नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली में मौजूद खामियां हैं। उन्होंने सरकार से छात्रों पर सख्ती करने के बजाय शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की।
इन सभी प्रतिक्रियाओं के सामने आने के बाद छात्र आंदोलन को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस और तेज हो गई है। जहां एक ओर छात्र अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं, वहीं दूसरी ओर कई सार्वजनिक हस्तियों के समर्थन ने इस मुद्दे को और अधिक चर्चा में ला दिया है। हालांकि, इन बयानों को संबंधित व्यक्तियों की सार्वजनिक राय के रूप में देखा जाना चाहिए और इनसे जुड़े तथ्यों एवं घटनाओं की पुष्टि संबंधित सरकारी पक्ष और आधिकारिक स्रोतों से की जानी चाहिए।
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