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छपरा: बिहार में सरकारी विद्यालयों की स्थिति सुधारने के लिए सरकार लगातार दावे कर रही है, लेकिन सारण जिले के मकेर प्रखंड स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय, जमलकी की तस्वीर इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। यहां 220 नामांकित छात्र-छात्राओं की पढ़ाई महज छह शिक्षकों के भरोसे चल रही है। सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि कक्षा 6 से 8 तक की पढ़ाई के लिए केवल एक शिक्षक उपलब्ध है, जबकि नियमानुसार कम से कम चार शिक्षकों की आवश्यकता है।

विद्यालय में शिक्षकों की कमी का असर सीधे बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। मजबूरी में कक्षा 5 के शिक्षक को कक्षा 8 के विद्यार्थियों को भी पढ़ाना पड़ता है। इससे न केवल पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, बल्कि छात्रों को भी पर्याप्त समय और मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा।

विद्यालय में कुल चार कमरे हैं, जबकि यहां कक्षा 1 से 8 तक की पढ़ाई होती है। कमरों की कमी के कारण एक ही कक्ष में कई कक्षाओं के छात्रों को एक साथ बैठाकर पढ़ाया जाता है। एक कमरे में कक्षा 1, 2 और 3 के बच्चे एक साथ बैठते हैं, वहीं दूसरे कमरे में दो कक्षाएं संचालित होती हैं। तीसरे कमरे में कक्षा 7 और 8 तथा चौथे कमरे में कक्षा 4 से 6 तक के छात्रों की पढ़ाई कराई जाती है। कई बार एक ही कमरे में चार अलग-अलग कक्षाओं के छात्र मौजूद रहते हैं, जिससे शोर-शराबा बढ़ जाता है और शिक्षक का ध्यान सभी बच्चों तक समान रूप से नहीं पहुंच पाता।

विद्यालय भवन की स्थिति भी चिंताजनक बताई जा रही है। भवन जर्जर हो चुका है और चारदीवारी कई जगह से टूटी हुई है। इसके कारण बाहरी लोगों का विद्यालय परिसर में प्रवेश आसान हो गया है। कई बार आवारा पशु भी परिसर में घुस आते हैं, जिससे बच्चों की सुरक्षा पर खतरा बना रहता है। बरसात के दिनों में परिसर में जलजमाव और गर्मी के मौसम में धूल की समस्या बच्चों की परेशानी बढ़ा देती है। वहीं सर्दियों में ठंडी हवा सीधे कक्षाओं में प्रवेश करती है, जिससे पढ़ाई प्रभावित होती है।

विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक मोहम्मद जमील अंसारी का कहना है कि शिक्षकों की कमी और भवन की मरम्मत को लेकर शिक्षा विभाग को कई बार लिखित और मौखिक रूप से अवगत कराया गया है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों से भी समस्या के समाधान की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।

ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि यदि समय रहते विद्यालय में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति और भवन की मरम्मत नहीं हुई, तो बच्चों की शिक्षा पर इसका दीर्घकालिक असर पड़ेगा। उनका कहना है कि सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं और वे बेहतर शिक्षा के लिए पूरी तरह सरकारी व्यवस्था पर निर्भर हैं। ऐसे में आवश्यक संसाधनों की कमी उनके भविष्य को प्रभावित कर सकती है।

यह मामला एक बार फिर सरकारी स्कूलों में आधारभूत सुविधाओं, शिक्षक नियुक्ति और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत की ओर ध्यान आकर्षित करता है।


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