मोहम्मद शहाबुद्दीन के बाद क्या मरते दम तक आनंद मोहन को जेल में बंद रहना पड़ेगा, सुप्रीम कोर्ट से क्या फैसला आने वाला है
सिवान के पूर्व बाहुबली सांसद मोहम्मद शाहबुद्दीन जब जेल से बाहर निकले तब उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए उस समय के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर एक विवादित बयान दिया था. मोहम्मद शाहबुद्दीन ने कहा था कि नीतीश कुमार परिस्थिति के मुख्यमंत्री हैं और उनके नेता तो सिर्फ और सिर्फ लालू प्रसाद यादव हैं. फिर क्या था इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में मानो भूचाल आ गया और उसके बाद बिहार सरकार ने मोहम्मद शाहबुद्दीन को जेल भेजने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और उसके बाद मरते दम तक मोहम्मद शाहबुद्दीन को जेल में रहना पड़ा.
अब लगता है कुछ ऐसी ही गलती पूर्व बाहुबली सांसद आनंद मोहन कर बैठे हैं. स्वतंत्र भारत में आनंद मोहन पहले ऐसे राजनेता है जिन्हें फांसी की सजा दी गई और उसके बाद पटना हाई कोर्ट के द्वारा उनकी सजा को उम्र कैद में बदल दिया गया. आनंद मोहन को जेल से बाहर निकालने के लिए नीतीश सरकार ने कानून में बदलाव किया और अब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हो चुकी है और फैसला सुरक्षित रख लिया गया है सवाल उठता है कि क्या शहाबुद्दीन की तरह आनंद मोहन को भी रिहा होने के बाद जेल जाना होगा और मरते दम तक जेल में रहना होगा पढ़िए यह विस्तृत रिपोर्ट....
आनंद मोहन की रिहाई पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, फैसला सुरक्षित; टिप्पणी से बढ़ी राजनीतिक और कानूनी हलचल
नई दिल्ली: बिहार के पूर्व सांसद आनंद मोहन की रिहाई एक बार फिर कानूनी बहस के केंद्र में आ गई है। सुप्रीम कोर्ट ने 1994 के चर्चित जी. कृष्णैया हत्याकांड में दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी लोक सेवक की ड्यूटी के दौरान हुई हत्या को क्या "दुर्लभतम से दुर्लभ" मामलों में नहीं माना जाना चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में दोषियों को राहत देने से गलत संदेश जाता है और इससे सरकारी अधिकारियों के खिलाफ अपराध करने वालों का मनोबल बढ़ सकता है। हालांकि, अदालत ने अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया है और अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
यह मामला तत्कालीन आईएएस अधिकारी जी. कृष्णैया की पत्नी उमा कृष्णैया द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। उन्होंने बिहार सरकार द्वारा 2023 में जेल नियमों में किए गए संशोधन और उसके आधार पर आनंद मोहन को दी गई रिहाई को चुनौती दी है।
आनंद मोहन को जी. कृष्णैया की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। ट्रायल कोर्ट ने 5 अक्टूबर 2007 को उन्हें मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। बाद में 10 दिसंबर 2008 को पटना हाईकोर्ट ने इस सजा को कठोर आजीवन कारावास में बदल दिया, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा।
बिहार सरकार ने वर्ष 2023 में जेल नियमावली में संशोधन कर ड्यूटी के दौरान सरकारी कर्मी की हत्या के दोषियों को रिहाई से वंचित रखने वाले प्रावधान को हटाया था। इसी संशोधन के बाद लगभग 16 वर्ष जेल में रहने के पश्चात 27 अप्रैल 2023 को आनंद मोहन रिहा हुए थे। इस फैसले पर उस समय भी व्यापक राजनीतिक और कानूनी विवाद हुआ था।
आनंद मोहन की रिहाई के लिए उनकी पत्नी और वर्तमान जेडीयू सांसद लवली आनंद तथा बेटे चेतन आनंद ने लंबे समय तक अभियान चलाया था। बाद में दोनों की राजनीतिक भूमिका भी बदली और वर्तमान में दोनों जेडीयू से जुड़े हैं।
अब सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणियों के बाद इस मामले पर फिर से चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, अदालत ने अभी अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। ऐसे में यह स्पष्ट होगा कि बिहार सरकार के संशोधित नियम और आनंद मोहन की रिहाई कानूनी कसौटी पर कितनी टिकती है। फिलहाल सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी है।
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