thedailybihar.com

 



नई दिल्ली। देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित किया। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने नक्सलवाद, महिला आरक्षण, युवाओं के कौशल विकास, आत्मनिर्भर भारत और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य समेत कई मुद्दों पर सरकार की प्राथमिकताएं सामने रखीं। प्रधानमंत्री ने खास तौर पर ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए समाज और युवाओं को ऐसे तत्वों से सावधान रहने की अपील की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश ने हथियारबंद नक्सलवाद के खिलाफ लंबे संघर्ष के बाद बड़ी सफलता हासिल की है। उन्होंने दावा किया कि अब नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास का नया दौर दिखाई दे रहा है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि हथियारबंद नक्सलवाद के कमजोर होने के बावजूद वैचारिक स्तर पर समाज को भटकाने वाली ताकतों से सतर्क रहने की जरूरत है।

मोदी ने कहा कि ‘दिमागी नक्सल’ मौके की तलाश में रहते हैं और समाज को गलत दिशा में ले जाने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाते हैं। उन्होंने युवाओं को ऐसे प्रभावों से बचाने और देश के विकास के लक्ष्य से जोड़ने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री का यह बयान उनके स्वतंत्रता दिवस संबोधन के सबसे चर्चित हिस्सों में शामिल रहा।

महिला आरक्षण पर राजनीतिक दलों से अपील

प्रधानमंत्री मोदी ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों से सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए और राजनीतिक दलों को इसे राजनीतिक श्रेय का विषय बनाने के बजाय महिलाओं के अधिकार के तौर पर आगे बढ़ाना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने राजनीतिक दलों से कहा कि यदि इस व्यवस्था को लागू करने में किसी को राजनीतिक लाभ या श्रेय मिलता है तो वह भी ले सकता है, लेकिन महिलाओं को उनका अधिकार मिलना जरूरी है। उन्होंने इसे देश की माताओं और बहनों की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने एक बार फिर 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि अब देश को छोटे लक्ष्यों से आगे बढ़कर बड़े सपने देखने होंगे। इसके लिए काम करने के तरीके और सोच में भी बदलाव जरूरी है।

मोदी ने कहा कि जिन कामों को पूरा करने में पिछले कई दशकों का समय लगा, उनमें से कई महत्वपूर्ण कार्यों को आने वाले वर्षों में तेजी से पूरा करना होगा। उन्होंने युवाओं को विकसित भारत की यात्रा का प्रमुख आधार बताया और देश की नई पीढ़ी से बड़ी भूमिका निभाने का आह्वान किया।

युवाओं के लिए AI ट्रेनिंग और फ्री कोचिंग

प्रधानमंत्री के भाषण में युवाओं और रोजगार से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता मिली। उन्होंने घोषणा की कि अगले एक साल में एक करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की ट्रेनिंग देने का लक्ष्य रखा गया है।

इसके अलावा गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद देने के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग व्यवस्था शुरू करने की बात कही गई। सरकार की इस पहल का उद्देश्य महंगी कोचिंग का खर्च उठाने में असमर्थ विद्यार्थियों को डिजिटल माध्यम से तैयारी का अवसर उपलब्ध कराना है।

प्रधानमंत्री ने युवाओं को देश की भविष्य की ताकत बताते हुए कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए नई तकनीक, कौशल और शिक्षा पर विशेष ध्यान देना होगा। AI को उन्होंने आने वाले समय में रोजगार और आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार बताया।

आत्मनिर्भर भारत पर जोर

प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी अपने भाषण का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया। उन्होंने कहा कि दुनिया में कई चीजें सस्ती और आसानी से उपलब्ध हो सकती हैं, लेकिन केवल दूसरे देशों पर निर्भर रहने से देश की अपनी क्षमता मजबूत नहीं होती।

उन्होंने कहा कि भारत को अपनी जरूरतों के लिए अपनी क्षमताओं का विस्तार करना होगा। ऊर्जा, तकनीक, रक्षा, उद्योग और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता को उन्होंने देश के दीर्घकालिक हित से जोड़ा।

प्रधानमंत्री ने बदलती वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया में संसाधनों और तकनीक के इस्तेमाल को लेकर नई चुनौतियां पैदा हुई हैं। ऐसे माहौल में भारत का आत्मनिर्भर होना पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है।

ग्लोबलाइजेशन पर भी टिप्पणी

प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्वीकरण को लेकर भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि एक समय भारत के आत्मनिर्भरता पर जोर देने को लेकर सवाल उठाए जाते थे। लेकिन बदलती अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों ने दुनिया के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।

उन्होंने कहा कि कई देश अब संसाधनों, तकनीक और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों को रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में भारत को अपने हितों की सुरक्षा खुद करने की क्षमता विकसित करनी होगी।

आपदाओं के बीच बड़े संकल्प की जरूरत

प्रधानमंत्री ने देशवासियों से बड़े सपने देखने और मजबूत संकल्प के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियां और आपदाएं विकास की राह में बाधा जरूर बन सकती हैं, लेकिन दृढ़ संकल्प के साथ उनसे रास्ता निकाला जा सकता है।

उनका संदेश था कि भारत को अब छोटे लक्ष्यों तक सीमित नहीं रहना है। देश की युवा शक्ति, तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भरता के आधार पर बड़े राष्ट्रीय लक्ष्यों को हासिल करना होगा।

पहली बार समारोह में ‘वंदे मातरम्’ का विशेष उल्लेख

लाल किले पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में इस वर्ष ‘वंदे मातरम्’ को विशेष रूप से प्रमुखता दी गई। इसके बाद प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और राष्ट्रगान हुआ। समारोह में परंपरा के अनुसार 21 तोपों की सलामी भी दी गई।

कुल मिलाकर प्रधानमंत्री मोदी का 80वें स्वतंत्रता दिवस का संबोधन सुरक्षा, आत्मनिर्भरता, युवा शक्ति, महिला भागीदारी और विकसित भारत के लक्ष्य के इर्द-गिर्द केंद्रित रहा। एक ओर उन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की उपलब्धियों को रेखांकित किया, तो दूसरी ओर ‘दिमागी नक्सल’ के जरिए वैचारिक चुनौतियों को लेकर चेतावनी दी।

युवाओं के लिए AI प्रशिक्षण और मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग की घोषणा को भाषण की प्रमुख घोषणाओं में माना जा रहा है। वहीं महिला आरक्षण को लागू करने के लिए सभी दलों से सहयोग की अपील ने राजनीतिक बहस को भी नई दिशा दी है। प्रधानमंत्री ने साफ संदेश दिया कि 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य केवल सरकार का नहीं, बल्कि देश की पूरी युवा पीढ़ी और नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी है।


आप भी अपने गांव की समस्या घटना से जुड़ी खबरें हमें 7870192482 पर भेज सकते हैं...



Previous Post Next Post