मैथिली रंगमंच के कुणाल को संगीत नाटक अकादमी सम्मान,, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया सम्मानित, रंगकर्मियों में खुशी
मैथिली रंगमंच के चर्चित नाट्य निर्देशक और ‘भंगिमा’ संस्था के संस्थापक सदस्यों में शामिल कुणाल जी को संगीत नाटक अकादमी सम्मान के लिए चयनित किए जाने पर मैथिली रंगकर्मियों और साहित्य जगत में खुशी की लहर है। उन्हें मैथिली नाट्य विधा को समृद्ध करने और लंबे समय तक रंगमंच के क्षेत्र में योगदान देने के लिए बधाई दी जा रही है।
कुणाल जी ने मैथिली नाटक के निर्देशन और मंचन को एक अलग पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके निर्देशन में कई चर्चित प्रस्तुतियां मंचित हुई हैं। इनमें ‘रुक्मिणी हरण’ और ‘पारिजात हरण’ जैसी प्रस्तुतियां विशेष रूप से उल्लेखनीय मानी जाती हैं।
सम्मान की घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर एक लेख के जरिए मैथिली रंगमंच की मौजूदा स्थिति पर भी टिप्पणी की गई। लेख में कहा गया कि मैथिली में नाटक लिखने और मंचित करने की परंपरा काफी मजबूत है, लेकिन कई बार बिना पर्याप्त अध्ययन और प्रशिक्षण के लोग स्वयं को नाटककार, निर्देशक और अभिनेता घोषित कर लेते हैं। इसके कारण लंबे समय से गंभीरता और अनुशासन के साथ रंगकर्म करने वाले कलाकारों को अपेक्षित पहचान नहीं मिल पाती।
लेख में कहा गया कि देर से ही सही, अब मैथिली रंगमंच के गंभीर और समर्पित कलाकारों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है। पिछले वर्ष मैथिली नाटक के क्षेत्र में योगदान के लिए प्रेमलता मिश्र ‘प्रेम’ को सम्मानित किए जाने का उल्लेख करते हुए इसे मैथिली रंगमंच के लिए गौरव का विषय बताया गया।
कुणाल जी को सम्मान मिलने पर लेख में उन लोगों के प्रति भी आभार जताया गया, जो योग्य रंगकर्मियों के नाम राष्ट्रीय सम्मान के लिए सामने लाने और उनके पक्ष में लगातार प्रयास करते हैं।
इस सम्मान को मैथिली रंगमंच की उपलब्धि बताते हुए उम्मीद जताई गई कि इससे गंभीर, प्रतिबद्ध और लंबे समय से रंगकर्म को समर्पित कलाकारों को आगे बढ़ने का प्रोत्साहन मिलेगा।
Follow @Dailybiharliveआप भी अपने गांव की समस्या घटना से जुड़ी खबरें हमें 7870192482 पर भेज सकते हैं...


