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आरक्षण को लेकर एनडीए में जारी बयानबाजी अब और तीखी हो गई है। चिराग पासवान द्वारा जीतन राम मांझी और उनके बेटे संतोष सुमन से इस्तीफा मांगने के बाद मांझी ने पलटवार करते हुए कहा कि अगर इस्तीफे की बात है तो पहले चिराग पासवान को ही इस्तीफा देना चाहिए।

आरक्षण के मुद्दे पर मांझी लगातार वंचित और अत्यंत पिछड़े दलित समुदायों तक आरक्षण का लाभ पहुंचाने के लिए व्यवस्था में बदलाव और कोटे के भीतर कोटा की वकालत कर रहे हैं। वहीं, चिराग पासवान आरक्षण में क्रीमी लेयर या किसी तरह के बदलाव के विरोध में हैं और इसे सामाजिक न्याय तथा संवैधानिक अधिकार से जोड़कर देख रहे हैं।

इस विवाद ने एनडीए के भीतर आरक्षण को लेकर अलग-अलग राय को खुलकर सामने ला दिया है। मांझी का कहना है कि उनकी लड़ाई आरक्षण खत्म करने के लिए नहीं, बल्कि उन समुदायों को उनका हक दिलाने के लिए है, जिन्हें मौजूदा व्यवस्था का पर्याप्त लाभ नहीं मिल पाया है।

अब चिराग पासवान और मांझी के बीच आमने-सामने की बयानबाजी ने बिहार की राजनीति में आरक्षण के मुद्दे को और गर्म कर दिया है।


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