पटना। बिहार में जाति के नाम को लेकर चल रहे विवाद के बीच एक अहम जानकारी सामने आई है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी में खुलासा हुआ है कि सवर्ण आयोग ने भूमिहार जाति के नाम से ‘ब्राह्मण’ शब्द हटाने की कोई सिफारिश नहीं की थी।
मामला तब चर्चा में आया, जब 24 जुलाई को विधानसभा में सरकार की ओर से तत्कालीन उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कथित तौर पर कहा था कि सवर्ण आयोग की सिफारिश के आधार पर भूमिहार ब्राह्मण का नाम बदलकर सिर्फ भूमिहार किया गया। इसके बाद इस दावे को लेकर सवाल उठने लगे।
RTI से मिली जानकारी के अनुसार, सामान्य प्रशासन विभाग के पास आयोग की ओर से ऐसी किसी सिफारिश का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, जिसमें भूमिहार ब्राह्मण से ‘ब्राह्मण’ शब्द हटाने की बात कही गई हो।
राज्य आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. महाचंद्र प्रसाद सिंह ने भी इस मामले में स्पष्ट किया कि आयोग ने भूमिहार ब्राह्मण का नाम बदलने की कोई अनुशंसा नहीं की थी। उनके मुताबिक, भूमिहार ब्राह्मण होने के साक्ष्य और प्रमाण सामान्य प्रशासन विभाग को भेजे जा चुके हैं।
विवाद की शुरुआत 24 जुलाई को उस समय हुई थी, जब भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री जीवेश कुमार ने जमीन के दस्तावेजों में जाति के नाम में ‘भूमिहार ब्राह्मण’ दर्ज करने की मांग उठाई थी। इसके जवाब में सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से नकारात्मक रुख अपनाए जाने की बात सामने आई।
अब RTI से सामने आई जानकारी ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। सवाल यह है कि यदि आयोग ने ऐसी कोई सिफारिश नहीं की थी, तो फिर भूमिहार के आधिकारिक नाम में बदलाव का आधार क्या था? प्रशासनिक रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही इस विवाद की पूरी तस्वीर सामने आएगी।
Follow @Dailybiharliveआप भी अपने गांव की समस्या घटना से जुड़ी खबरें हमें 7870192482 पर भेज सकते हैं...

