पटना। बिहार सरकार ने वर्ष 2030 तक राज्य की एक करोड़ महिलाओं को रोजगार से जोड़ने का बड़ा लक्ष्य तय किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार की प्रगति का रास्ता महिलाओं के आर्थिक विकास से होकर गुजरता है। सरकार महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए हरसंभव सहयोग करेगी।
मुख्यमंत्री ने मंगलवार को सीएम सचिवालय स्थित संवाद सभागार में रक्षाबंधन के पूर्व आयोजित कार्यक्रम में महिलाओं को रोजगार और स्वास्थ्य से जोड़ने के लिए तीन दिवसीय विशेष अभियान की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि सात निश्चय-3 के तहत वर्ष 2030 तक एक करोड़ लोगों को सरकारी नौकरी और रोजगार देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसी क्रम में अब एक करोड़ महिलाओं को रोजगार से जोड़ने का नया लक्ष्य तय किया गया है।
मुख्यमंत्री ने पशुपालन और दुग्ध क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में करीब 12 लाख महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाकर 50 लाख से अधिक करने का लक्ष्य है। महिलाओं को सुधा सखी, जीविका सुधा बिक्री केंद्र और दूध संग्रहण केंद्रों से जोड़कर रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा।
उन्होंने कहा कि बिहार के डेयरी क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को 80 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत सुधा बिक्री केंद्र खोलने वाली महिलाओं को दूसरी और तीसरी किस्त मिलाकर करीब 60 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है।
सरकार सभी पंचायतों में एक सुधा बिक्री केंद्र खोलने की योजना पर भी काम कर रही है। इसके लिए दीदियों का चयन लॉटरी के माध्यम से किया जाएगा और योजना का विस्तार गांवों तक किया जाएगा। इसके अलावा राज्य के सभी 534 प्रखंडों में पशु औषधि बिक्री केंद्र खोलने का अभियान भी शुरू किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाकर ही बिहार को विकास की नई ऊंचाई तक पहुंचाया जा सकता है। सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2047 तक बिहार देश का सबसे ताकतवर राज्य बने।
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