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Patna : अगर लक्ष्य बड़ा हो और उसे हासिल करने का जुनून दिल में हो, तो कोई भी मुश्किल रास्ता मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकता। बिहार के औरंगाबाद जिले की बेटी मोनिका श्रीवास्तव ने अपनी मेहनत, धैर्य और लगातार प्रयासों से इस बात को सच साबित कर दिखाया है। IIT में दाखिले से लेकर BPSC और फिर दो बार UPSC परीक्षा पास करने तक का उनका सफर हर उस युवा के लिए प्रेरणादायक है, जो अपने सपनों को सच करने के लिए संघर्ष कर रहा है।

मोनिका श्रीवास्तव बिहार के औरंगाबाद जिले के सत्येन्द्र नगर की रहने वाली हैं। उनके पिता बी.के. श्रीवास्तव जिला परिषद में सहायक अभियंता हैं, जबकि उनकी मां भारती श्रीवास्तव गृहिणी हैं। बचपन से ही पढ़ाई में होनहार रहीं मोनिका ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर और बाद में DAV पब्लिक स्कूल से पूरी की। स्कूल के दिनों से ही उन्होंने अपनी प्रतिभा का परिचय देना शुरू कर दिया था।

इंजीनियर बनने का सपना लेकर मोनिका ने IIT की प्रवेश परीक्षा की तैयारी की और शानदार प्रदर्शन करते हुए बिहार टॉपर बनीं। इसके बाद उन्होंने IIT गुवाहाटी से कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के बाद उन्हें कई प्रतिष्ठित वैश्विक कंपनियों में काम करने का अवसर मिला। उनके सामने एक सफल कॉर्पोरेट करियर था, लेकिन उनका सपना सिर्फ अच्छी नौकरी पाना नहीं था। वह समाज और देश के लिए कुछ ऐसा करना चाहती थीं, जिससे लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ सके।

इसी सोच ने उन्हें कॉर्पोरेट दुनिया छोड़कर सिविल सेवा की तैयारी करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने पूरी लगन और अनुशासन के साथ पढ़ाई शुरू की। उनकी मेहनत का पहला बड़ा परिणाम वर्ष 2022 में सामने आया, जब उन्होंने BPSC परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए छठा स्थान हासिल किया। इस सफलता ने उनके आत्मविश्वास को और मजबूत किया तथा उन्हें यह भरोसा दिलाया कि वह UPSC जैसी कठिन परीक्षा भी पास कर सकती हैं।

मोनिका ने पहली बार UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2024 में सफलता हासिल की। उन्हें ऑल इंडिया 455वीं रैंक मिली और भारतीय रेलवे सेवा में चयन हुआ। वह प्रशिक्षण भी ले रही थीं, लेकिन उनके मन में IAS अधिकारी बनने का सपना अभी अधूरा था। उन्होंने हार नहीं मानी, बल्कि फिर से पूरी ताकत के साथ तैयारी शुरू की।

लगातार मेहनत, सही रणनीति और अटूट आत्मविश्वास का परिणाम वर्ष 2025 में देखने को मिला, जब मोनिका श्रीवास्तव ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया 16वीं रैंक हासिल कर शानदार सफलता दर्ज की। इस उपलब्धि के साथ उनका IAS अधिकारी बनने का सपना साकार हो गया। उनकी सफलता से न केवल परिवार बल्कि पूरा औरंगाबाद जिला और बिहार गौरवान्वित है।

मोनिका अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता और परिवार को देती हैं, जिन्होंने हर कठिन समय में उनका साथ दिया और हमेशा बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित किया। उनकी कहानी यह सिखाती है कि असफलता या छोटी सफलता पर रुकने के बजाय यदि लगातार बेहतर बनने का प्रयास किया जाए, तो सबसे ऊंची मंजिल भी हासिल की जा सकती है।

आज मोनिका श्रीवास्तव लाखों युवाओं, खासकर बिहार की बेटियों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उनका सफर बताता है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता, बल्कि मेहनत, धैर्य, अनुशासन और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण ही व्यक्ति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाता है। उनकी यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों को भी बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस देती रहेगी।


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