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पटना: बिहार सरकार ने राज्य के बंद पड़े चीनी उद्योग को फिर से पटरी पर लाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने निर्णय लिया है कि दरभंगा की रैयाम, मधुबनी की सकरी और गोपालगंज की सासामूसा चीनी मिल को नवंबर 2026 से शुरू होने वाले इसी पेराई सत्र में चालू किया जाएगा। इससे हजारों गन्ना किसानों को राहत मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

सरकारी योजना के अनुसार रैयाम और सकरी चीनी मिल में प्रतिदिन 3,500 टन गन्ने की पेराई होगी। दोनों सहकारी चीनी मिलों में 14-14 मेगावाट बिजली उत्पादन की भी व्यवस्था होगी। इन मिलों का संचालन इंडियन पोटाश लिमिटेड (आईपीएल) को सौंपा जाएगा। दोनों परियोजनाओं का प्रस्ताव सहकारिता विभाग ने तैयार कर राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए भेज दिया है और जल्द स्वीकृति मिलने की उम्मीद है।



राज्य सरकार ने पहले चरण में 10 चीनी मिलों को शुरू करने की योजना बनाई है। इनमें 6 बंद पड़ी मिलों को पुनर्जीवित किया जाएगा, जबकि 4 नई चीनी मिलें स्थापित की जाएंगी। इसके अलावा सरकार का लक्ष्य राज्य में 25 नई और 9 बंद चीनी मिलों का संचालन शुरू करना है।

हाल ही में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने चीनी उद्योग की प्रगति की समीक्षा बैठक में अन्य बंद मिलों को भी जल्द चालू करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। रैयाम और सकरी की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार हो चुकी है और गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में सहकारी समितियों का गठन भी किया जा चुका है।

सरकार मुजफ्फरपुर के मोतीपुर में भी चीनी उद्योग को नया स्वरूप देने की तैयारी में है। यहां इंडियन पोटाश लिमिटेड से 266 एकड़ जमीन वापस लेकर लगभग 100 एकड़ में नई चीनी मिल स्थापित की जाएगी, जबकि शेष भूमि पर अन्य औद्योगिक इकाइयां विकसित की जाएंगी।

इसके अलावा पूर्वी चंपारण के ढेकहा और घोड़ासाहन तथा नवादा के वारिसलीगंज में नई चीनी मिलों की स्थापना के लिए जमीन चिह्नित कर ली गई है। सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से बिहार में चीनी उद्योग को नई ऊर्जा मिलेगी, किसानों की आय बढ़ेगी और राज्य के औद्योगिक विकास को भी गति मिलेगी।


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