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पटना:
बिहार सरकार ने राज्य के शहरी विकास और तेज़ परिवहन व्यवस्था को नई दिशा देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कुल 22 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इनमें सबसे अहम फैसला पटना सहित सात प्रमुख शहरों को रैपिड रेल नेटवर्क से जोड़ने का है।

सरकार के अनुसार, राज्य में चार रैपिड रेल कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे। इनके माध्यम से पटना-गया, पटना-हाजीपुर-बेगूसराय, पटना-मुजफ्फरपुर और पटना-आरा के बीच तेज़ रफ्तार रेल सेवा शुरू करने की योजना है। इस परियोजना का उद्देश्य यात्रा का समय कम करना, बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना और क्षेत्रीय विकास को गति देना है। सरकार का मानना है कि यह परियोजना दिल्ली-एनसीआर की तर्ज पर बिहार में आधुनिक सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगी।
कैबिनेट ने रैपिड रेल परियोजना की व्यवहार्यता और विस्तृत अध्ययन के लिए आवश्यक स्वीकृतियां भी प्रदान की हैं। अधिकारियों का कहना है कि परियोजना पूरी होने के बाद रोजगार, व्यापार और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही, पटना पर बढ़ते यातायात का दबाव कम होगा और आसपास के शहरों का तेज़ी से विकास संभव होगा।
बैठक में इसके अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण फैसले भी लिए गए। विक्रमशिला सेतु के रखरखाव और मरम्मत के लिए राशि स्वीकृत की गई। पटना एम्स के विस्तार, तीन जिलों में नए केंद्रीय विद्यालय खोलने, किसानों के लिए योजनाओं, दुग्ध क्षेत्र को बढ़ावा देने और मोतिपुर चीनी मिल की जमीन से जुड़े प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई।
सरकार का कहना है कि रैपिड रेल परियोजना बिहार के बुनियादी ढांचे में बड़ा बदलाव लाएगी और आने वाले वर्षों में राज्य की आर्थिक एवं सामाजिक प्रगति को नई गति देगी।


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