बिहार में छात्र आंदोलन को लेकर एक बार फिर माहौल गरमाता दिखाई दे रहा है। 22 जुलाई को पटना में हुए छात्र आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारियों के बाद अब छात्र संगठनों की ओर से सरकार के खिलाफ आवाज तेज होने लगी है।
एक तरफ कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP ने सरकार पर समझौता तोड़ने का आरोप लगाते हुए दोबारा आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है। वहीं दूसरी तरफ AISA अध्यक्ष नेहा बोरा बेऊर जेल पहुंचीं और वहां बंद छात्रों तथा जनप्रतिनिधियों से मुलाकात करने के बाद सरकार को 29 जुलाई तक का अल्टीमेटम दिया है।
यानी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद अब बिहार की राजधानी पटना में छात्रों के समर्थन में एक और बड़े आंदोलन की जमीन तैयार होती दिखाई दे रही है।
CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सरकार पर आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई नहीं करने को लेकर जो समझौता हुआ था, उसका पालन नहीं किया जा रहा है।
आशुतोष रांका का कहना है कि बिहार और पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में छात्रों को गिरफ्तार किया गया है। उनका आरोप है कि प्रदर्शनकारियों को झूठे मुकदमों में फंसाया जा रहा है।
CJP की ओर से सरकार से यह भी मांग की गई है कि कानूनी मामलों को लेकर हुए लिखित समझौते की प्रति और भारत सरकार के साथ तय समय-सीमा की जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने भी आरोप लगाया कि असम, पश्चिम बंगाल और बिहार में छात्रों तथा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया जा रहा है।
CJP का कहना है कि देशव्यापी आंदोलन केंद्र सरकार के आश्वासन के बाद स्थगित किया गया था। पार्टी के मुताबिक सरकार ने भरोसा दिया था कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी।
अब CJP ने चेतावनी दी है कि अगर हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा नहीं किया गया और एफआईआर वापस लेने की दिशा में कदम नहीं उठाया गया, तो पार्टी दोबारा आंदोलन करने के लिए मजबूर होगी।
इसी बीच बिहार में AISA ने भी आंदोलन का ऐलान कर दिया है।
AISA अध्यक्ष नेहा बोरा सोमवार को पटना के बेऊर केंद्रीय कारा पहुंचीं। उन्होंने जेल में बंद छात्र नेताओं, विधायक और दूसरे छात्रों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना।
जेल से बाहर आने के बाद नेहा बोरा ने कहा कि बंद छात्रों ने उन्हें पुलिस कार्रवाई के दौरान कथित दुर्व्यवहार की जानकारी दी है।
उनके मुताबिक छात्रों ने आरोप लगाया कि पुलिस का व्यवहार ठीक नहीं था और उनके साथ अनुचित तरीके से पेश आया गया।
नेहा बोरा ने सरकार से साफ तौर पर मांग की कि 29 जुलाई तक गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों को रिहा किया जाए।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो 30 जुलाई को बिहारभर में व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
नेहा बोरा ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ी तो जंतर-मंतर जैसी भीड़ बिहार की सड़कों पर भी उतर सकती है।
बेऊर जेल में नेहा बोरा ने जेल अधिकारियों से भी बातचीत की। उन्होंने बताया कि अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि जेल में बंद छात्रों और अन्य लोगों को किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी और उन्हें आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
हालांकि इस पूरे मामले में मीडिया पर हुए कथित हमले का सवाल भी उठा। मीडिया कर्मियों पर हमले को लेकर पूछे गए सवाल पर नेहा बोरा ने कोई टिप्पणी नहीं की।
वहीं छात्र नेता अजीत कुशवाहा ने पत्रकारों पर हुए हमले की निंदा की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मीडिया की स्वतंत्रता का सम्मान होना चाहिए और पत्रकारों पर हमला किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
अब दोनों घटनाक्रमों को जोड़कर देखें तो बिहार में छात्र आंदोलन एक बार फिर बड़े मोड़ पर खड़ा दिखाई दे रहा है।
CJP सरकार को समझौते के पालन और गिरफ्तार लोगों की रिहाई को लेकर चेतावनी दे रही है, तो AISA ने 29 जुलाई तक का समय देते हुए 30 जुलाई को बिहारभर में आंदोलन का ऐलान कर दिया है।
ऐसे में अब सवाल है कि क्या सरकार 29 जुलाई तक प्रदर्शनकारियों की रिहाई को लेकर कोई कदम उठाएगी?
क्या गिरफ्तार छात्रों और जनप्रतिनिधियों को राहत मिलेगी?
या फिर 30 जुलाई को बिहार की राजधानी पटना समेत प्रदेश के दूसरे हिस्सों में एक बार फिर छात्र सड़कों पर उतरेंगे?
फिलहाल 22 जुलाई के आंदोलन के बाद शुरू हुआ विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। अब सबकी नजर 29 और 30 जुलाई पर है। इन दो तारीखों में सरकार का फैसला और छात्र संगठनों का अगला कदम यह तय करेगा कि बिहार में छात्र आंदोलन आगे किस दिशा में जाता है।
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