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दिनकर के नाम पर विश्वविद्यालय, सिमरिया से भागलपुर तक बनेगा मरीन ड्राइव; शिक्षा और पर्यटन को मिलेगी नई दिशा

पटना/बेगूसराय। बिहार सरकार ने शिक्षा, संस्कृति और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं करते हुए राज्य के विकास की नई रूपरेखा पेश की है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार को बेगूसराय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान 551 'सरस्वती विद्या निकेतन' (मॉडल स्कूल) का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' के नाम पर विश्वविद्यालय स्थापित करने, सिमरिया से भागलपुर तक गंगा किनारे मरीन ड्राइव बनाने तथा सिमरिया में भगवान श्री वेंकटेश्वर (तिरुपति) मंदिर के निर्माण की घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार को शिक्षा, संस्कृति और आधुनिक आधारभूत ढांचे के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। उनका कहना था कि राज्य के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अब दूसरे राज्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

सरकार द्वारा शुरू किए गए 551 मॉडल स्कूलों में आधुनिक स्मार्ट क्लास, डिजिटल स्टूडियो, विज्ञान प्रयोगशालाएं और तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इन विद्यालयों में आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को NEET और JEE जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी निशुल्क कराई जाएगी। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि इस पहल से लगभग चार लाख विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

उन्होंने कहा कि बिहार से हर वर्ष बड़ी संख्या में छात्र उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए दिल्ली, कोटा और अन्य शहरों का रुख करते हैं। सरकार का प्रयास है कि राज्य में ही बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार कर इस "ब्रेन ड्रेन" को रोका जाए। उनका मानना है कि आधुनिक शिक्षा व्यवस्था से गरीब और ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को भी समान अवसर मिलेंगे।

कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के सम्मान में उनके नाम पर विश्वविद्यालय स्थापित करने की घोषणा भी की गई। सरकार का कहना है कि इससे साहित्य, भाषा और शोध के क्षेत्र में नई संभावनाएं विकसित होंगी तथा दिनकर की वैचारिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने सिमरिया से भागलपुर तक गंगा किनारे मरीन ड्राइव विकसित करने की योजना का भी ऐलान किया। प्रस्तावित परियोजना से गंगा तटीय क्षेत्रों में बेहतर सड़क संपर्क विकसित होगा, जिससे पर्यटन, व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेस-वे के निर्माण का भी उल्लेख किया गया, जिससे उत्तर बिहार और पूर्वी भारत के बीच आवागमन तेज होगा तथा कोलकाता तक यात्रा का समय काफी कम होने की संभावना है।

धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सिमरिया में लगभग 10 एकड़ भूमि पर भगवान श्री वेंकटेश्वर (तिरुपति) मंदिर बनाने की भी घोषणा की गई। सरकार का मानना है कि इस परियोजना से देशभर से श्रद्धालु बिहार आएंगे, जिससे स्थानीय रोजगार और पर्यटन उद्योग को नई गति मिलेगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिक्षा, सांस्कृतिक पहचान, धार्मिक पर्यटन और बुनियादी ढांचे से जुड़ी इन घोषणाओं के जरिए सरकार विकास और रोजगार को प्रमुख मुद्दा बनाकर आगे बढ़ना चाहती है। हालांकि इन परियोजनाओं की वास्तविक सफलता उनके समयबद्ध क्रियान्वयन और वित्तीय व्यवस्था पर निर्भर करेगी। यदि ये योजनाएं निर्धारित समय पर पूरी होती हैं, तो बिहार की शिक्षा, पर्यटन और आर्थिक विकास को निश्चित रूप से नई दिशा मिल सकती है।


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