बिहार की पहली नदी जोड़ परियोजना पूरी: बागमती-बूढ़ी गंडक लिंक से तीन जिलों को मिलेगी बाढ़ से राहत
पटना: बिहार में जल संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। राज्य की पहली नदी जोड़ (रिवर लिंक) परियोजना का निर्माण कार्य पूरा हो गया है। इस परियोजना के तहत बागमती नदी को बूढ़ी गंडक नदी से जोड़ने के लिए बनाई गई लिंक नहर तैयार हो चुकी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी रविवार को इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्घाटन करेंगे।
करीब तीन वर्ष पहले शुरू हुई इस परियोजना का उद्देश्य बागमती नदी के अतिरिक्त जल का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग करना है। बरसात के दौरान बागमती में अधिक जल प्रवाह होने से हर साल बाढ़ की स्थिति बन जाती है, जबकि बूढ़ी गंडक में अपेक्षाकृत कम पानी रहता है। नई लिंक नहर के माध्यम से अतिरिक्त पानी को बूढ़ी गंडक में पहुंचाया जाएगा, जिससे बाढ़ का खतरा कम होगा और सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध हो सकेगा।
जल संसाधन विभाग के अनुसार, इस परियोजना से मुजफ्फरपुर, शिवहर और सीतामढ़ी जिलों को बाढ़ से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। वहीं शिवहर, पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी के किसानों को सिंचाई की बेहतर सुविधा मिलेगी। अनुमान है कि करीब 8.5 लाख आबादी इस परियोजना से सीधे लाभान्वित होगी।
परियोजना के तहत बेलवा (शिवहर) से मीनापुर (मुजफ्फरपुर) के बीच लगभग 68.80 किलोमीटर लंबी लिंक नहर का निर्माण किया गया है। इस पर करीब 130.88 करोड़ रुपये की लागत आई है। निर्माण कार्य वर्ष 2023 में शुरू हुआ था और अब इसे पूरी तरह तैयार कर लिया गया है।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि तीन साल पहले नहर में पानी का प्रवाह शुरू होने के बाद से ही आसपास के क्षेत्रों में भू-जल स्तर में सुधार देखा गया है। इस वर्ष पिछले वर्षों की तुलना में भू-गर्भ जल की स्थिति बेहतर रही है और आने वाले समय में इसमें और सुधार होने की संभावना है।
परियोजना में जल प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए आधुनिक हेड रेगुलेटर का निर्माण भी किया गया है, जिसमें छह गेट लगाए गए हैं। आवश्यकता के अनुसार इन गेटों के जरिए पानी का प्रवाह नियंत्रित किया जाएगा। इससे बाढ़ नियंत्रण के साथ-साथ सिंचाई के लिए भी पानी का बेहतर प्रबंधन संभव होगा।
सरकार का कहना है कि यह परियोजना बिहार में जल संसाधनों के समेकित और वैज्ञानिक प्रबंधन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यदि इसका परिणाम उम्मीद के अनुरूप रहता है, तो भविष्य में राज्य के अन्य नदी तंत्रों को जोड़ने की दिशा में भी ऐसी योजनाओं पर विचार किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना केवल बाढ़ नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि उत्पादन बढ़ाने, भू-जल संरक्षण और जल संसाधनों के संतुलित उपयोग की दिशा में भी अहम भूमिका निभाएगी। इससे किसानों की सिंचाई संबंधी समस्याएं कम होंगी और क्षेत्र के समग्र विकास को गति मिलने की उम्मीद है।
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