पटना: बिहार के पंचायती राज मंत्री और उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश की मंत्री पद की संवैधानिक स्थिति को लेकर चल रहे विवाद के बीच बीजेपी की ओर से बड़ा राजनीतिक कदम सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक बीजेपी के विधान परिषद सदस्य देवेश कुमार अपने MLC पद से इस्तीफा देने जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि वह जल्द ही विधान परिषद के सभापति से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं। चर्चा है कि यह कदम दीपक प्रकाश को विधान परिषद का सदस्य बनाने का रास्ता साफ करने के लिए उठाया जा रहा है।
कौन हैं देवेश कुमार?
देवेश कुमार करीब एक दशक पहले बीजेपी से जुड़े थे। इससे पहले वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े रहे और जेएनयू में छात्र राजनीति में सक्रिय रहे। इसके बाद उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में भी काम किया और विभिन्न अखबारों से जुड़े रहे।
बीजेपी में आने के बाद उन्हें पार्टी का प्रदेश प्रवक्ता बनाया गया। इसके बाद संगठन में उन्हें कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं। बाद में वह राज्यपाल कोटे से विधान परिषद सदस्य बने और पार्टी में महामंत्री की जिम्मेदारी भी संभाली।
क्यों उठे दीपक प्रकाश की कुर्सी पर सवाल?
दीपक प्रकाश ने 20 नवंबर 2025 को मंत्री पद की शपथ ली थी। उस समय वह बिहार विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं थे। संविधान के अनुच्छेद 164(4) के तहत गैर-विधायक मंत्री को छह महीने के भीतर विधानमंडल का सदस्य बनना जरूरी होता है।
हालांकि, 14 अप्रैल 2026 को नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद मंत्रिपरिषद भंग हो गई। इसके बाद सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार बनी और 7 मई को दीपक प्रकाश को दोबारा मंत्री बनाया गया। लेकिन इस बार भी वह किसी सदन के सदस्य नहीं थे।
इसी मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर हुई। अदालत ने बिहार सरकार, दीपक प्रकाश और चुनाव आयोग से जवाब मांगा था।
अब देवेश कुमार के संभावित इस्तीफे से दीपक प्रकाश के विधान परिषद पहुंचने का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर अंतिम संवैधानिक स्थिति अदालत के फैसले पर निर्भर करेगी।
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